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धरमजयगढ़ : छाल थाना क्षेत्र के कूड़ेकेला गांव के जंगलों में जुआ अब एक संगठित और खतरनाक कारोबार का रूप ले चुका है। दीपावली के त्योहार के नजदीक आते ही जुआरियों ने क्षेत्र में 52 पारियों के खेल को नए सिरे से शुरू कर दिया है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, 1 हजार से 5 हजार रुपये तक की हिस्सेदारी के साथ तेज गति से जुआ चल रहा है। खिलाड़ियों को लुभाने के लिए बकरा और मुर्गा पार्टी जैसे आयोजनों का सहारा लिया जा रहा है, जो इस अवैध धंधे को और बढ़ावा दे रहा है।
कुछ समय पहले, जब मोहन भारद्वाज छाल थाना प्रभारी थे, तब जुए और अन्य अवैध गतिविधियों पर कड़ा प्रहार किया गया था। जंगलों में लगातार छापेमारी और सख्त कार्रवाई ने जुआरियों की कमर तोड़ दी थी, जिसके चलते क्षेत्र में जुआ पूरी तरह बंद हो गया था। लेकिन, वर्तमान थाना प्रभारी त्रिनाथ त्रिपाठी के कार्यकाल में जुआरियों के हौसले फिर से बुलंद हो गए हैं। और प्रभारी के नजर से दूर है,
कूड़ेकेला के जंगलों में जुआ अब न केवल एक सामाजिक बुराई बन चुका है, बल्कि यह कई परिवारों की आर्थिक और मानसिक तबाही का कारण भी बन रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जुए ने अब संगठित अपराध का रूप ले लिया है। जुआरियों ने इसे एक बड़े व्यापार में तब्दील कर दिया है, जिसमें भारी मात्रा में पैसों का लेन-देन हो रहा है। इस लत में फंसकर लोग अपनी जमा-पूंजी, जमीन, और यहां तक कि पारिवारिक रिश्तों को दांव पर लगा रहे हैं। कई परिवारों की आर्थिक स्थिति चरमरा गई है, और सामाजिक तानाबाना भी छिन्न-भिन्न हो रहा है।
ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ रहा है, क्योंकि छाल पुलिस की ओर से इस गंभीर समस्या पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। जुआरियों के खिलाफ नरमी और छापेमारी की कमी ने उनके मनोबल को और बढ़ा दिया है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि जुए के इस अवैध धंधे पर तत्काल अंकुश लगाया जाए। जंगलों में नियमित छापेमारी, सख्त कानूनी कार्रवाई, और जुआरियों के सरगनाओं को पकड़ने की जरूरत है, ताकि इस सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म किया जा सके।।