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धरमजयगढ़ छाल में ‘सत्ता’ के रसूख और ‘नियम’ के बीच जंग, शासकीय जमीन पर कब्जे को लेकर गरमाया माहौल!

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धरमजयगढ़ छाल में ‘सत्ता’ के रसूख और ‘नियम’ के बीच जंग, शासकीय जमीन पर कब्जे को लेकर गरमाया माहौल!

कीदा में शासकीय जमीन पर अवैध निर्माण, अधिकारी ने रुकवाया काम तो ‘नेताओं’ के आने लगे फोन!

 

जय जोहार इंडिया TV न्यूज नेटवर्क रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ राजस्व विभाग अंतर्गत छाल तहसील से एक बड़ा मामला सामने आ रहा है। ग्राम पंचायत कीदा में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर ग्रामीणों और प्रशासन ने मोर्चा खोल दिया है, लेकिन अब इस मामले में ‘सियासी तड़के’ की गूंज सुनाई दे रही है। सूत्रों की मानें तो एक अवैध निर्माण को बचाने के लिए सत्ताधारी नेताओं ने अधिकारियों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। यह बात अवैध मकान निर्माण करने वाले व्यक्ति गांव में बोल रहा है।
शासकीय जमीन
स्कूल और अस्पताल की जमीन पर ‘नजर’
ग्राम पंचायत कीदा के शासकीय स्कूल और अस्पताल के ठीक पीछे स्थित बेशकीमती सरकारी जमीन पर एक बाहरी व्यक्ति(अर्थात कुछ वर्ष पहले की निवासी) द्वारा अवैध मकान का निर्माण कराया जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह व्यक्ति कुछ साल पहले दूसरे गांव से आकर यहां बसा और सांठगांठ कर अपना आधार और वोटर आईडी कार्ड बनवा लिया। अब उसकी नजर सरकारी जमीन पर है।
फाइल फोटो
ग्रामीणों का विरोध और अधिकारी की त्वरित कार्रवाई
जब ग्रामीणों ने इस अवैध निर्माण को रोकने की कोशिश की, तो कब्जाधारी ने उसे अनसुना कर दिया। इसके बाद जागरूक ग्रामीणों ने मामले की लिखित शिकायत अधिकारी से की। अधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल संज्ञान लिया और मौके पर काम रुकवा कर निर्माण कार्य को प्रतिबंधित कर दिया। प्रशासन की इस कार्रवाई से ग्रामीणों में उम्मीद जगी थी।
गुप्त सूत्रों’ का बड़ा खुलासा: फोन पर आ रहा दबाव!
लेकिन कहानी में ट्विस्ट यहीं से शुरू होता है। खबर मिल रही है कि जैसे ही काम रुका, सत्ताधारी दल के बड़े नेताओं के फोन घनघनाने शुरू हो गए हैं। अधिकारी के कार्यालय में दबाव बनाया जा रहा है कि निर्माण कार्य में कोई बाधा न आए और अवैध कब्जे को अभयदान दे दिया जाए।
ग्रामीण पक्ष “हम अपने गांव की सरकारी जमीन को लुटते नहीं देख सकते। स्कूल और अस्पताल के विस्तार के लिए यह जमीन जरूरी है। अगर राजनीतिक दबाव में प्रशासन झुका, तो हम आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।”
— ग्रामवासी कीदा
सवाल??
अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन नियमों के साथ खड़ा रहेगा या नेताओं के दबाव में घुटने टेक देगा? क्या कीदा की सरकारी जमीन भू-माफियाओं और बाहरी लोगों के भेंट चढ़ जाएगी? यह देखना दिलचस्प होगा कि रायगढ़ जिला प्रशासन इस ‘पॉलिटिकल प्रेशर’ से कैसे निपटता है।।

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