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छत्तीसगढ़ के वनांचल में आसमान से गहराता ‘खौफ’: पुरूंगा, बड़गड़खोला और तौलीपाली में ग्रामीणों का हल्लाबोल, बड़े आंदोलन की सुगबुगाहट

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छत्तीसगढ़ के वनांचल में आसमान से गहराता ‘खौफ’: पुरूंगा, बड़गड़खोला और तौलीपाली में ग्रामीणों का हल्लाबोल, बड़े आंदोलन की सुगबुगाहट

रायगढ़/कोरबा: छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्रों में पिछले कई दिनों से आसमान में उड़ते हवाई जहाजों और अज्ञात उड़नखट्टों ने आदिवासियों के बीच हड़कंप मचा दिया है। रायगढ़ और कोरबा जिले के पेसा (PESA) कानून के अंतर्गत आने वाले गांवों में तनाव की स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि शासन-प्रशासन उनकी संवैधानिक शक्तियों की अनदेखी कर गुप्त रूप से सर्वेक्षण कर रहा है।
सर्वेक्षण या अधिकारों पर हमला?
मामला रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ (पुरूंगा क्षेत्र) और खरसिया ब्लॉक (बर्रा-जोबी) सहित कोरबा जिले के करतला (चचिया और तौलीपाली) क्षेत्र का है। स्थानीय आदिवासियों का कहना है कि पांचवीं अनुसूची और पेसा कानून के तहत ग्राम सभा की अनुमति के बिना किसी भी प्रकार का हवाई सर्वेक्षण या बाहरी हस्तक्षेप अवैध है।

पूर्व में दी गई थी चेतावनी
ग्रामीणों के अनुसार, यह विरोध अचानक शुरू नहीं हुआ है।
ज्ञापन और शिकायत: क्षेत्र के ग्रामीणों द्वारा पूर्व में कई बार शासन और प्रशासन को लिखित ज्ञापन सौंपा जा चुका है।
अनसुनी हुई मांगें: बार-बार गुहार लगाने के बावजूद प्रशासन की ओर से हवाई गतिविधियों के उद्देश्य को लेकर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।
जारी है प्रदर्शन: वर्तमान में इन क्षेत्रों में धरना-प्रदर्शन और छोटे स्तर पर आंदोलन लगातार जारी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक यह ‘संदिग्ध’ हवाई आवाजाही बंद नहीं होती, वे शांत नहीं बैठेंगे।
बड़े आंदोलन की तैयारी
प्रशासनिक चुप्पी से नाराज आदिवासी समाज अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनके जल-जंगल-जमीन पर इस तरह का ‘आसमानी पहरा’ बंद नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में बड़ा उग्र आंदोलन किया जाएगा।
ग्रामीणों का मुख्य सवाल: “जब हम ज़मीन के मालिक हैं, तो हमारी अनुमति के बिना हमारे सिर के ऊपर क्या तलाशा जा रहा है? क्या यह भविष्य में बड़े विस्थापन या खनन की साजिश है?”

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