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सड़कों पर मौत का तांडव: TRN एनर्जी के ओवरलोड डंपरों पर कब कसेगा शिकंजा?
छत्तीसगढ़, रायगढ़,

जय जोहार इंडिया TV न्यूज भारत के सबसे लोकप्रिय न्यूज नेटवर्क
घरघोड़ा की सड़कों पर TRN एनर्जी का ‘मौत का तांडव’
डंपर नहीं, ये तो ‘यमराज’ के वाहन हैं! ओवरलोडिंग और रफ्तार से थर्राया रायगढ़; प्रशासन की चुप्पी ने खड़े किए सवाल
रायगढ़/घरघोड़ा/धरमजयगढ़
रायगढ़ जिले में सड़क सुरक्षा के तमाम सरकारी दावे और नियम धरातल पर दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। घरघोड़ा क्षेत्र में स्थित TRN एनर्जी पावर लिमिटेड से निकलने वाली हजारों टन फ्लाई ऐश (राख) आज आम जनता के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं है। नियमों को ताक पर रखकर सड़कों पर दौड़ते ये ओवरलोड डंपर न केवल पर्यावरण की धज्जियां उड़ा रहे हैं, बल्कि राहगीरों की जिंदगी से भी सरेआम खिलवाड़ कर रहे हैं।
सड़कों पर ‘हिलोरे’ मारती मौत: ओवरलोडिंग की इंतहा
धरमजयगढ़/घरघोड़ा की सड़कों पर TRN प्लांट से निकलने वाले डंपर अपनी निर्धारित क्षमता से कई गुना अधिक वजन लेकर सड़कों को रौंद रहे हैं। आलम यह है कि अत्यधिक वजन के कारण ये डंपर सड़कों पर इस कदर लहराते हैं कि सामने से आने वाले दोपहिया वाहन चालक अपनी जान बचाने के लिए डंपर के गुजरने तक किनारे खड़े होने को मजबूर हैं।

“ये डंपर चलते नहीं, बल्कि मौत की तरह हिलोरे मारते हैं। इनकी रफ्तार और भार देखकर ऐसा लगता है कि ड्राइवर नहीं, बल्कि यमराज खुद स्टीयरिंग थामे हुए हैं।” — स्थानीय निवासी
जहरीली राख: ‘डस्ट ज़ोन’ में तब्दील हुआ इलाका
मुनाफे के लालच में कंपनी प्रबंधन और डंपर संचालक सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज कर रहे हैं।
प्रशासन की आंखों में धूल झोंकने के लिए फटे-पुराने तिरपालों का उपयोग किया जा रहा है।
स्वास्थ्य पर हमला
उड़ती राख के कारण लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ जैसी गंभीर बीमारियां घेर रही हैं।
सड़कों पर फिसलन: सड़क पर बिछी राख की मोटी परत के कारण दोपहिया वाहन चालक आए दिन फिसलकर चोटिल हो रहे हैं।
भारतमाला प्रोजेक्ट की आड़ में नियमों की बलि?
जानकारी के अनुसार, TRN एनर्जी की यह राख धरमजयगढ़ क्षेत्र में बन रही ‘भारतमाला सड़क’ के निर्माण में इस्तेमाल की जा रही है। विकास के नाम पर हो रहे इस परिवहन ने विनाश का रास्ता खोल दिया है। क्या एक सड़क बनाने की कीमत आम आदमी की जान देकर चुकानी होगी?
प्रशासन की ‘रहस्यमयी चुप्पी’ पर उठते बड़े सवाल
हैरानी की बात यह है कि मौत का यह नंगा नाच जिला प्रशासन, पुलिस, परिवहन विभाग और पर्यावरण विभाग की नाक के नीचे चल रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी कई संदेह पैदा करती है:
क्या प्रशासन किसी भीषण सड़क हादसे का इंतजार कर रहा है?
क्या उद्योगपतियों का रसूख सरकारी नियमों से ऊपर हो गया है?
बार-बार शिकायतों के बाद भी डंपरों की जब्ती और भारी जुर्माना क्यों नहीं लगाया जा रहा?
कब टूटेगी कुंभकर्णी नींद?
TRN एनर्जी और डंपर संचालकों की यह खतरनाक ‘जुगलबंदी’ घरघोड़ा के भविष्य को अंधकार में धकेल रही है। यदि समय रहते इन ‘सफेद पाउडर’ ढोने वाले वाहनों पर नकेल नहीं कसी गई, तो जनता को इसकी भारी कीमत चुकानी होगी। अब देखना यह है कि प्रशासन अपनी नींद से कब जागता है और कब इन बेलगाम डंपरों पर कार्रवाई का चाबुक चलता है।।



