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हवा में जहर सड़कों पर कहर क्या उड़ती राख के नीचे दब गई है सरकार की गाइडलाइन

छत्तीसगढ़

हवा में जहर सड़कों पर कहर क्या उड़ती राख के नीचे दब गई है सरकार की गाइडलाइन

​छाल :- राजधानी के आलीशान एसी कमरों में जब नियमों की फाइलें खुलती हैं तो लगता है कि व्यवस्था चाक चौबंद है। विधानसभा के भीतर खरसिया विधायक उमेश पटेल के तीखे सवालों पर जब वित्त मंत्री ने फ्लाईएश निपटान की कठोर गाइडलाइंस गिनाईं तो लगा मानों अब एक कण भी बाहर नहीं गिरेगा। लेकिन हकीकत हकीकत सड़कों पर फर्राटे मारते उन मौत के सौदागरों ओवरलोड ट्रकों के टायरों के नीचे कुचली जा रही है।​विधानसभा में चर्चा का दौर जारी है लेकिन धरातल पर उद्योग प्रबंधन और रसूखदार ठेकेदारों ने सरकार की गाइडलाइंस की धज्जियां उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। वित्त मंत्री ने बताया था कि फ्लाईएश का निपटान कहाँ और कैसे होना है लेकिन साहब.नियमों की ये पोथी शायद उन ठेकेदारों तक नहीं पहुँची जिन्हें चन्द रुपयों के मुनाफे के आगे हजारों जिंदगियां राखके बराबर लगती है।

​क्षेत्र में चल रहे प्लांटों से निकलने वाले ये ट्रक मानों किसी नियम को नहीं पहचानते। न तिरपाल की चिंता है न ही ओवरलोड का खौफ।

अगर किसी ट्रक पर तिरपाल दिखता भी हैतो वो इतना जर्जर और फटा होता है कि उससे ज्यादा इज्जत तो छलनी की होती है।सड़कों पर दुपहिया वाहन चालक और पैदल चलने वाले लोग धूल के ऐसे बवंडर से गुजर रहे हैं जहाँ सांस लेना भी किसी जंग से कम नहीं है।

​ हैरानी की बात तो यह है कि यह सब खुलेआम हो रहा है। जिम्मेदार अधिकारी या तो कुंभकर्णी नींद में सो रहे हैं या फिर उन्हें धूप की तपिश इतनी ज्यादा लगती है कि वे अपने ठंडे चैंबरों से बाहर निकलकर इन मनमानी करने वाले ट्रकों को रोकने की जहमत नहीं उठा पा रहे। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है या फिर उद्योगों की राख के नीचे आम आदमी की आवाज दब चुकी है ​क्या विधानसभा में दिए गए जवाब सिर्फ कागजी खानापूर्ति के लिए थे

​क्या परिवहन और पर्यावरण विभाग ने इन उड़ते हुए खतरों’ को खुली छूट दे रखी है

​ओवरलोडिंग और बिना ढके परिवहन करने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई करने से किसके हाथ कांप रहे है।

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