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जिले के सभी ग्राम पंचायतों में 7 अप्रैल को मनाया जाएगा रोजगार एवं आवास दिवस

छत्तीसगढ़

जिले के सभी ग्राम पंचायतों में 7 अप्रैल को मनाया जाएगा रोजगार एवं आवास दिवस

आवास, रोजगार, जल संरक्षण और महिला सशक्तिकरण पर रहेगा विशेष फोकस

छाल/ जिले में ग्रामीण विकास को नई गति देने के उद्देश्य से 7 अप्रैल को सभी ग्राम पंचायतों में “रोजगार दिवस” एवं “आवास दिवस” का व्यापक आयोजन किया जाएगा। शासन के दिशा-निर्देशानुसार इस दिन “चावल महोत्सव” के साथ इन कार्यक्रमों को जनभागीदारी के रूप में मनाया जाएगा। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकार की प्रमुख योजनाओं-प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना तथा हितग्राहियों की समस्याओं का त्वरित समाधान करना है।
जिला प्रशासन ने इस आयोजन को गांव-गांव तक प्रभावी बनाने के लिए विशेष रणनीति तैयार की है, जिसमें जनप्रतिनिधियों, पंचायत पदाधिकारियों, स्व-सहायता समूहों और आम ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इस दिन ग्राम सभाओं का आयोजन कर योजनाओं की समीक्षा, प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने और नए लक्ष्यों का निर्धारण किया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य है कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
आवास दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत स्वीकृत सभी आवासों को अधिकतम 90 दिनों के भीतर पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए पंचायत स्तर पर कार्ययोजना बनाकर ग्राम सभाओं में चर्चा की जाएगी। लाभार्थियों को उनकी किश्तों की जानकारी दी जाएगी, लंबित जियो-टैगिंग कार्यों को पूरा किया जाएगा और प्राप्त शिकायतों का मौके पर निराकरण किया जाएगा। इससे न केवल आवास निर्माण में तेजी आएगी, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।
रोजगार दिवस के तहत मनरेगा के अंतर्गत चल रहे कार्यों की समीक्षा कर उन्हें शीघ्र पूर्ण करने पर जोर दिया जाएगा। साथ ही, ग्रामीणों की मांग के अनुसार नए कार्यों को स्वीकृति देने की प्रक्रिया को भी तेज किया जाएगा। “मोर गाँव-मोर पानी” अभियान के अंतर्गत “नवा तरिया- आय के जरिया” पहल को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी, जिसके तहत नए तालाबों के निर्माण के लिए स्थलों का चयन कर दो माह के भीतर कार्य पूर्ण करने की योजना बनाई गई है। यह पहल जल संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीणों के लिए आय के नए स्रोत भी विकसित करेगी। इसके अलावा, आजीविका डबरी निर्माण के माध्यम से ‘लाइवलीहुड लेयरिंग’ (आजीविका संवर्धन)को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे किसानों और ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि हो सके। महिला सशक्तिकरण की दिशा में स्व-सहायता समूहों की भूमिका को मजबूत किया जाएगा। नागरिक सूचना पटलों पर समूह से जुड़ी महिलाओं के नाम प्रदर्शित किए जाएंगे और उन्हें सामग्री आपूर्ति व अन्य आर्थिक गतिविधियों में प्राथमिकता दी जाएगी। तकनीकी नवाचार को भी इस आयोजन में विशेष स्थान दिया गया है। मनरेगा और आवास योजना से जुड़े कार्यों की जानकारी अब क्यूआर कोड के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी, जिन्हें स्कैन कर ग्रामीण सीधे योजना से संबंधित विवरण प्राप्त कर सकेंगे। अमृत सरोवरों और अन्य प्रमुख स्थलों पर इन क्यूआर कोड्स को स्थापित किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और जागरूकता दोनों बढ़ेंगी।
जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे 7 अप्रैल को अपने-अपने ग्राम पंचायतों में आयोजित इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में भाग लें। साथ ही, रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसी जल संरक्षण तकनीकों को अपनाकर भविष्य के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखने में योगदान दें। यह आयोजन न केवल योजनाओं की समीक्षा का अवसर होगा, बल्कि ग्रामीण विकास को नई दिशा देने का एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित होगा।

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