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बस्तर दंतेवाड़ा में 1910 बस्तर बुमकाल स्मृति दिवस कार्यक्रम में राजस्थान के तीनों BAP-MLA शामिल हुए…..

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बस्तर दंतेवाड़ा में 1910 बस्तर बुमकाल स्मृति दिवस कार्यक्रम में राजस्थान के तीनों BAP-MLA शामिल हुए…..

जय जोहार इंडिया टीवी.कॉम jaijoharindiatv.com:- आज दिनांक 04-02-2024 को ग्राम हिरानार गीदम ब्लॉक में सर्व आदिवासी समाज दंतेवाड़ा द्वारा 1910 के महान बुमकाल आंदोलन के यादगार में स्मृति दिवस मनाया गया है, इसी हिरानार गांव से बस्तर बुमकाल क्राति 4फरवरी 1910 से शुरू हो कर 27 फरवरी तक पुरे बस्तर में अंग्रेजों के खिलाफ हुआ था, इसलिए आज सर्व आदिवासी समाज आज इस आम बगीचे से 7 फरवरी को गीदम में और 10 फरवरी को कुआकोंडा ब्लॉक के ग्राम गढमिरी रोड्डा पेद्दा चौक में हर साल की तरह इस साल भी जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित होगा, आज के इस कार्यक्रम में शामिल दंतेवाड़ा सर्व आदिवासी समाज पदाधिकारी तिरु.मासा कुंजाम, तिरु.भल्लू भवानी, तिरु.लखमा तर्मा, तिरू.जोगा कश्यप, तिरु.जयराम कश्यप, तिरु.महेश स्वर्ण, रामविलास रावटे,बसलू भोगाम, हेमलाल कुंजाम आदि एवं साथी उपस्थित हुए रहे।

*इस बस्तर दंतेवाड़ा बुमकाल कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में राजस्थान के “भारत आदिवासी पार्टी” के चौरासी विधायक- तिरु.राजकुमार रोत, धरियावद के तिरु.थावर चंद डामोर, और आसपुर से तिरु.उमेश डामोर आदि युवा MLA विशेष अतिथि के रूप शामिल रहे

 राजकुमार रोत BAP- MLA छग में चार बार आ चुके हैं और बस्तर में 2 बार, उन्होंने कहा बस्तर के भूमकाल में शहीद हुए पूर्वजों को नमन करते हुए कहा, हमारे समाज में एकजूटता आजादी से पहले ठीक-ठाक रहा आज वर्तमान स्थिति ऐसा क्यों देखने को मिल रहा है, आजादी के बाद एकजूटता नहीं हो पा रही है, हम लोग वास्तविकता इतिहास नहीं जान पा रहे हैं इसलिए वर्तमान स्थिति ऐसे बनी हुई देखने को मिल रहा है इसके लिए यहां के सामाजिक बुद्धि जीवी, वरिष्ठ नागरिक जिम्मेदार है,मैं यहां MLA हूं इसलिए नहीं आया हूं,मैं आदिवासी हूं इसलिए यह आया हूं, बस्तर में नरसंहार थम नहीं रही है, दूध मेही बच्ची, पिता को नहीं छोड़ रहे हैं गंभीर विषय बना हुआ है पूरे भारत में, इसीलिए हमारे पूर्वजों गुंडाधुर,डेबरीधुर,बिरसा मुंडा,रोड्डा पेद्दा जैसे क्रांतिकारी की इतिहास को जानना बहुत जरूरी हैं,

थावर चंद डामोर BAP-MLA

 आदिवासी समाज के युवाओं को एक जूटता एवं संवैधानिक जागरूकता पर बोले

उच्चतम न्यायालय का फैसला बनाम महाराष्ट्र 05 -01 -2011 जजमेंट के अनुसार आदिवासी ही भारत का मूल मलिक है। अर्थात राष्ट्र है,ये सिर्फ बोलने के लिए रख दिए हैं आज भी हमारे समाज धरधर में भटक रहा है, सरकारी दफ्तरों में दुर्व्यवहार किया जाता है। इसलिए एक रोटी कम खाना अपने बच्चों को जरुर पढ़ाना 

उमेश डामोर BAP-MLA

आदिवासी अपने अधिकार की लड़ाई लड़ने हेतु संवैधानिक रूप से लड़ाई कलाम की लड़ाई पर बोले और स्थानीय युवा पीढ़ियों को आने वाले पीडियो के लिए शिक्षा के प्राथमिक स्तर से सुधार करने की जरूरत 

सरकार के सिस्टम में बैठे हुए व्यक्ति को भी सुधारने की जरूरत है, तब सबको सम्मान अधिकार मिल सकता है नहीं तो अमीरी बढ़ती जाएगी गरीबी और गरीब होता जाएगा और हमारा जल, जंगल,जमीन की लूट जारी रहेगा।।

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