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शिवशक्ति के मिलन से भावविभोर हुआ रिलो ग्राम सती चरित्र और शिव पार्वती विवाह की जीवंत झांकी ने मोहा मन
छत्तीसगढ़

शिवशक्ति के मिलन से भावविभोर हुआ रिलो ग्राम सती चरित्र और शिव पार्वती विवाह की जीवंत झांकी ने मोहा मन
छाल :- अध्यात्म और भक्ति की अविरल धारा में डूबे रिलो ग्राम में आयोजित श्रीमद् देवी भागवत महापुराण शक्ति यज्ञ के सप्तम दिवस पर आज श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। गबेल परिवार द्वारा आयोजित इस अनुष्ठान में आज जब व्यासपीठ से पंडित राजेंद्र जी महाराज ने सती चरित्र और शिव पार्वती विवाह का प्रसंग छेड़ा तो पूरा पंडाल भक्ति के रस में सराबोर हो गया।कथा के मुख्य बिंदु में आज माता सती के चरित्र का मार्मिक वर्णन किया गया जिसे सुनकर भक्तों की आँखें नम हो गईं। इसके पश्चात तपस्या की पराकाष्ठा के बाद माता पार्वती के रूप में उनके पुनर्जन्म और भगवान शिव को पाने की उनकी प्रतीक्षा ने श्रोताओं को भावुक कर दिया। एक ओर माता गौरा सज धज कर अपने आराध्य की प्रतीक्षा में बैठी थीं तो दूसरी ओर महादेव की अलौकिक बारात के स्वागत की तैयारियाँ पूरे जोरों पर थीं।आज की कथा का विशेष आकर्षण शिव विवाह की भव्य झांकी रही। जैसे ही पंडाल में भगवान शिव की बारात ने प्रवेश किया दृश्य अत्यंत मनोरम हो उठा। इस अनूठी बारात में जहाँ एक ओर सज धज कर देवी देवता शामिल थे वहीं दूसरी ओर नर मुंड धारण किए भूत पिशाच और विभिन्न जीव जंतुओं के भेष में कलाकारों ने शिव की वास्तविक अघोर बारात का सजीव चित्रण किया।

व्यासपीठ से महाराज जी का संदेश - शिव ही सत्य हैं और शक्ति ही आधार। आज का प्रसंग केवल एक कथा नहीं बल्कि आत्मा का परमात्मा से मिलन का उत्सव है।
विवाह की रस्मों के दौरान पूरा पंडाल तालियों की गूँज और हरहर महादेव के जयघोष से गुंजायमान रहा। रिलो ग्राम सहित खरसिया शहर ठुसेकेला और दूर-दराज के अंचलों से आए भारी जनसमूह ने इस दिव्य विवाह का साक्षी बनकर खुद को धन्य माना। भक्तों ने झांकी के साथ नृत्य कर अपनी खुशी का इजहार किया। श्रद्धा का आलम यह था कि पूरा पंडाल छोटा पड़ गया लेकिन भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ।




