मुख्य समाचार

अभावों को मात देकर चमकी लैलूंगा की ‘हुलेश्वरी’: मिट्टी की झोपड़ी से तय किया मेरिट तक का सफर

छत्तीसगढ़, रायगढ़,

जय जोहार इंडिया TV न्यूज भारत के सबसे लोकप्रिय न्यूज नेटवर्क 

अभावों को मात देकर चमकी लैलूंगा की ‘हुलेश्वरी’: मिट्टी की झोपड़ी से तय किया मेरिट तक का सफर

जय जोहार इंडिया TV न्यूज नेटवर्क – लैलूंगा/रायगढ़:
जहाँ अक्सर अभाव सपनों की राह रोक लेते हैं, वहीं रायगढ़ जिले के लैलूंगा की एक आदिवासी बेटी ने साबित कर दिया कि हौसले बुलंद हों तो गरीबी कोई बाधा नहीं है। बनेकेला गांव की रहने वाली हुलेश्वरी राठिया ने बोर्ड परीक्षा में 510 अंक हासिल कर मेरिट सूची में अपनी जगह बनाई है।
संघर्ष की नींव पर सफलता की इमारत
हुलेश्वरी की यह जीत केवल अंकों की बाजीगरी नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों के विरुद्ध एक युद्ध की जीत है।

सरकारी स्कूल में शिक्षा और बिना किसी महंगे कोचिंग के पढ़ाई।
आर्थिक चुनौतियाँ: घर की माली हालत ठीक न होने के बावजूद हुलेश्वरी ने हर बाधा को अपनी ताकत बनाया।
साधारण पृष्ठभूमि: स्वामी आत्मानंद स्कूल, झगरपुर की छात्रा हुलेश्वरी ने केवल अपने आत्मविश्वास और दिन-रात की मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया।
माता-पिता का संबल बना बेटी का साहस
हुलेश्वरी की इस स्वर्णिम सफलता के पीछे उनके माता-पिता का मूक संघर्ष छिपा है:
पिता पतिराम राठिया: एक साधारण किसान/मजदूर पृष्ठभूमि से आने के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई में कभी कमी नहीं आने दी।
माता शिव कुमारी राठिया: हर मुश्किल घड़ी में अपनी बेटी का ढांढस बंधाया और उसे लक्ष्य के प्रति केंद्रित रखा।
“हुलेश्वरी की सफलता उन हजारों बच्चों के लिए एक मशाल है जो संसाधनों की कमी का रोना रोते हैं। मिट्टी की कच्ची गलियों से निकलकर मेरिट की ऊंचाइयों तक पहुंचना एक जीवंत मिसाल है।”
प्रेरणा का केंद्र बनी हुलेश्वरी
आज पूरे लैलूंगा और रायगढ़ जिले में हुलेश्वरी राठिया का नाम गर्व से लिया जा रहा है। उनकी यह उपलब्धि एक स्पष्ट संदेश देती है: बड़े सपने देखने के लिए बड़े बैंक बैलेंस की नहीं, बल्कि बड़े जिगर और अनुशासन की जरूरत होती है।।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Don`t copy text!