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स्कूली बच्चों एवं ग्रामीणों कीचड़ भरी सड़क में चलने को मजबूर, जिम्मेदार मौन?

छत्तीसगढ़, रायगढ़,

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स्कूली बच्चों एवं ग्रामीणों कीचड़ भरी सड़क में चलने को मजबूर, जिम्मेदार मौन?

ग्राम पंचायत की ये दशा कब सुधरेगी??

लेख – योगेश कुमार चौहान /करन एक्का 
रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकास खंड के कटकलिया ग्राम के मोहल्ला राजूनगर में ग्रामीणों को कीचड़ भरी सड़क से निकलने को मजबूर होना पड़ रहा है।

बारिश पूर्व सड़क मरम्मत का कार्य नहीं कराए जाने के कारण गांव के मुख्य मार्ग की हालत बदतर हो गई है।
जिस पर अब बारिश के कारण कीचड़ ही कीचड़ नजर आता है, कहीं-कहीं तो घुटनों-घुटनों पानी भरा और कीचड़ नजर आता है।
आवाजाही के लिए मुख्य मार्ग पर करीब 1 किलोमीटर तक रास्ता कीचड़ में तब्दील है। रास्ते में पानी की निकासी की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण यहां कीचड़ पसरा है।

जिसके कारण राजगीर और ग्रामीणों को सड़क मार्ग से निकलने में काफी परेशानी हो रही है। इसके बावजूद भी सड़क निर्माण नहीं कराया जा रहा है।
इसी सड़क से होकर लगभग 40 घरों की बस्ती के ग्रामीणों को आए दिन शासकीय कामकाज के लिए तहसील एवं अन्य स्थानों पर आना- जाना पड़ता है।
अगर पंचायत इस ओर ध्यान देती और समय से पहले रोड पर गड्ढों की भराई और मुरूम की बिछाई हो जाती तो आज यह स्थिति नहीं होती। इसी रास्ता का उपयोग सभी ग्रामवासी करते हैं। वहीं गांव में सड़क निर्माण के लिए कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

स्कूली बच्चे, दुपहिया एवं अन्य वाहन के लिए परेशानी

भारी कीचड़ परेशानी की मुख्य सबब रही है, जिसमें रोजाना स्कूली बच्चों का आना जाना रहती है कीचड़ के कारण बच्चों को स्कूल जाने में बड़ी मुसीबत का सामना करना पड़ता है, साथ ही वाहनों का आने जाने में मुसीबत का कारण बनी हुई है । सड़कें कीचड़ में तब्दील, राह इतनी खराब की पैदल चलना दूभर हो गया है

ग्रामीण बोले – जिम्मेदार नहीं ध्यान दे रहे

स्थानीय निवासियों ने बताया कि बारिश के पूरे सीजन में सड़क पर चारों तरफ कीचड़ ही कीचड़ रहता है, स्थानीय प्रशासन और जनपद के अधिकारी इस समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

चुनावी वादे के बाद नेता भूल जाते हैं !

ग्रामीण और मोहल्लावासी का कहना है कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, संबंधित जिम्मेदार, जिम्मेदारी से दूरी बनाए रखे हैं , सड़क के कीचड़ से हो रहे परेशानी से जनप्रतिनिधि अनदेखा कर रहे हैं। जनप्रतिनिधि गांव के विकास कार्यों को नजरअंदाज कर रहे हैं।
चुनाव के समय नेता बड़े-बड़े वादे करते हैं। जीतने के बाद कोई ध्यान नहीं देता। इसका खामियाजा गरीब आदिवासी जनता को भुगतना पड़ता है। सरकार की विभिन्न योजना होने के बाद भी कंक्रीट सड़क नहीं होना विकास के नाम पर ढोंग है।
फिलहाल देखते हैं की आमजनता की मांगों और समस्या का निदान कितनी दिनों में करती है।

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