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कापू,खम्हार,भोजपुर,बकलो क्षेत्र के जंगलों में मंडराता ‘अज्ञात’ चार्टर प्लेन: उद्योग या कोयला खदानों की आहट या कुछ और? ग्रामीणों में भारी दहशत!

छत्तीसगढ़, रायगढ़, धरमजयगढ़, कापू खम्हार

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कापू,खम्हार,भोजपुर,बकलो क्षेत्र के जंगलों में मंडराता ‘अज्ञात’ चार्टर प्लेन: उद्योग या कोयला खदानों की आहट या कुछ और? ग्रामीणों में भारी दहशत!

जय जोहार इंडिया TV न्यूज नेटवर्क छत्तीसगढ़ के रायगढ़ और धरमजयगढ़ क्षेत्र के सीमावर्ती गांवों में इन दिनों आसमान से उतरता डर लोगों की रातों की नींद उड़ा रहा है। बकालो, भोजपुर, सरिया, घोंचल, खम्हार और कापू जैसे ग्रामीण इलाकों में पिछले कई दिनों से एक चार्टर प्लेन लगातार उड़ान भर रहा है। घने जंगलों के बिल्कुल करीब और बेहद कम ऊंचाई पर उड़ने वाले इस विमान ने आदिवासियों और स्थानीय निवासियों के बीच हड़कंप मचा दिया है। आखिर यह विमान किसका है? और प्रशासन इस पर मौन क्यों है?

ग्रामीणों का कहना है कि यह विमान किसी सामान्य यात्रा पर नहीं, बल्कि किसी विशेष टोह (सर्वे) के लिए मंडरा रहा है। यह इलाका जैव-विविधता और घने जंगलों से घिरा हुआ है, जहां विमान की गूंज अब दहशत का पर्याय बन चुकी है। महीनों से जारी इस गतिविधि ने लोगों को गंभीर चिंतन में डाल दिया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस विमान को उड़ान भरने की अनुमति किसने दी और इसका उद्देश्य क्या है?
बताया जा रहा है बकालो और भोजपुर सरिया और घोंचल खम्हार और कापू एवं अन्य गांव के जंगली पहाड़ इलाके इस अनजानी उड़ान को स्थानीय लोग सीधे तौर पर कोयला खदानों या बड़े उद्योग के आवंटन से जोड़कर देख रहे हैं। चर्चा गर्म है कि क्षेत्र में नए कोल ब्लॉक आवंटित किए जा चुके हैं या उनकी प्रक्रिया अंतिम चरण में है। हाल ही में पुरुंगा कोल ब्लॉक को लेकर मचे बवाल और ग्रामीणों के कड़े विरोध की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि इस विमान की आवाजाही ने आग में घी डालने का काम किया है।

“हमें डर है कि यह हमारी जमीन छीनने की तैयारी है। बिना बताए हमारे सिर के ऊपर प्लेन उड़ रहे हैं, न सरकार कुछ बता रही है न कंपनी। हम अपनी जल-जंगल-जमीन को बचाने के लिए चिंतित हैं।” — (स्थानीय ग्रामीण)
आदिवासी बाहुल्य इस क्षेत्र में ग्रामीणों को डर है कि यह हवाई सर्वे उनकी विस्थापन की पटकथा लिख रहा है। पुरुंगा कोल ब्लॉक के अनुभव ने उन्हें पहले ही सतर्क कर दिया है। घने जंगलों के ऊपर इस तरह की संदिग्ध उड़ानें न केवल पर्यावरण के लिए बल्कि वन्यजीवों और इंसानी बस्तियों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा सवाल खड़ी करती हैं।

क्या यह विमान किसी निजी कंपनी का है जो कोयला खदानों के लिए मैपिंग कर रही है? या यह सरकारी तंत्र की किसी गुप्त योजना का हिस्सा है? महीनों से उड़ रहे इस चार्टर प्लेन पर जिला प्रशासन की चुप्पी कई संदेहों को जन्म दे रही है। फिलहाल, खम्हार,बकालो से लेकर कापू तक के लोग डरे हुए हैं और जवाब मांग रहे हैं?? हालांकि आज तक प्रशासन की तरफ से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।। 

 

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