हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी को लेकर लोगों में असमंजस, 14 सितंबर को ही रखे जाएंगे दोनों व्रत
छाल : इस वर्ष भाद्रपद शुक्ल पक्ष के दौरान हरतालिका तीज व्रत और गणेश चतुर्थी को लेकर श्रद्धालुओं के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है । शास्त्रीय विधान, उदया तिथि के नियमों और विद्वान पंडितों के अनुसार इस बार 14 सितंबर 2026 सोमवार को ही हरतालिका तीज व्रत और गणेश चतुर्थी की स्थापना व पूजन किया जाएगा।
क्या थी असमंजस की स्थिति
पंचांग के गणितीय आंकलन और तिथियों के घटने-बढ़ने के कारण कुछ क्षेत्रों में संशय की स्थिति बन रही थी कि हरतालिका तीज का कठिन व्रत किस दिन किया जाना चाहिए। कई जगहों पर तारीखों को लेकर असमंजस था कि पर्व 13 सितंबर को मनाया जाए या 14 सितंबर को।
शास्त्रीय विधान और पंडितों का स्पष्ट मत
धर्म ग्रंथों और पंचांग के जानकारों के अनुसार, सनातन धर्म में हरतालिका तीज का व्रत और गणेश उत्सव की शुरुआत हमेशा शास्त्र सम्मत उदया तिथि के आधार पर तय होती है। 14 सितंबर को सूर्योदय कालीन तृतीया व चतुर्थी के मान और शास्त्रीय नियमों के आधार पर इसी दिन सुहागिनें अपने अखंड सौभाग्य और पारिवारिक सुख-शांति के लिए हरतालिका का निर्जला व्रत रखेंगी साथ ही, इसी दिन गणेश चतुर्थी पर विघ्नहर्ता भगवान गणेश की प्राण-प्रतिष्ठा व स्थापना भी की जाएगी।
एक ही दिन दो बड़े पर्वों का दुर्लभ संयोग
एक ही दिन हरतालिका तीज और श्रीगणेश स्थापना का यह दुर्लभ संयोग धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत फलदायी माना जा रहा है। एक तरफ जहां महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करेंगी, वहीं दूसरी तरफ घरों और सार्वजनिक पंडालों में ‘गणपति बाप्पा मोरया’ के जयकारों के साथ गणेशोत्सव का शुभारंभ होगा। स्थिति स्पष्ट होने के बाद अब श्रद्धालुओं का असमंजस दूर हो गया है और वे पूरी आस्था व उत्साह के साथ पर्व की तैयारियों में जुट गए हैं।