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रायगढ़: SECL के खिलाफ लामबंद हुए ग्रामीण, 19 मई की जनसुनवाई रद्द करने के लिए कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
न्याय की मांग: “जमीन के बदले जमीन और समान मुआवजा मिले”, पेल्मा कोल माइंस से प्रभावित गांवों के ग्रामीणों का हल्लाबोल
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां ‘पेल्मा कोल माइंस परियोजना’ को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश अब सातवें आसमान पर पहुंच गया है। पेल्मा, उरबा और हिंजर समेत कई गांवों के ग्रामीणों ने एकजुट होकर जिला प्रशासन को अल्टीमेटम दे दिया है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे आगामी 19 मई को होने वाली जनसुनवाई का न केवल विरोध करेंगे, बल्कि धारा 144 का उल्लंघन कर सड़क पर उतरने को भी मजबूर होंगे।
दरअसल, रायगढ़ कलेक्टर को सौंपे गए एक ज्ञापन में ग्रामीणों ने SECL (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का मुख्य मुद्दा ‘समान मुआवजा राशि’ और ‘विस्थापन नीति’ को लेकर है।
सर्किल रेट में भेदभाव: ग्रामीणों का कहना है कि पेल्मा, उरबा, हिंजर, जरीडीह, लालपुर और मिलुपारा जैसे गांवों के लिए सर्किल रेट अलग-अलग तय किए गए हैं, जबकि जमीन एक ही प्रोजेक्ट के लिए ली जा रही है। ग्रामीण ‘एक रेट’ पर मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
जमीन के बदले जमीन: प्रभावितों का कहना है कि उनकी आजीविका पूरी तरह खेती पर निर्भर है। इसलिए उन्हें मुआवजे के साथ-साथ खेती के लिए अन्य शासकीय भूमि भी प्रदान की जाए।
पुनर्वास नीति के तहत परिवार के सदस्यों को नौकरी देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है।
ग्रामीणों ने पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा है कि वे अपनी कीमती दो-फसली जमीन देने के पक्ष में नहीं हैं। यदि शासन-प्रशासन उनकी मांगों को अनसुना करता है, तो वे आगामी 19 मई 2026 को होने वाली जनसुनवाई (Public Hearing) को रद्द करने की मांग करते हैं।
ज्ञापन में दी गई चेतावनी के अनुसार— “यदि हमारी मांगे पूरी नहीं हुई, तो हम समस्त ग्रामवासी एकजुट होकर धारा 144 का उल्लंघन करते हुए धरना-प्रदर्शन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।”