रायगढ़ में ‘जल-जंगल-जमीन’ पर आर-पार! 8 जून की जनसुनवाई के खिलाफ कलेक्टर दफ्तर में ग्रामीणों का महा-प्रदर्शन
छत्तीसगढ़, रायगढ़, तमनार

जय जोहार इंडिया TV न्यूज भारत के सबसे लोकप्रिय न्यूज नेटवर्क
रायगढ़ में ‘जल-जंगल-जमीन’ पर आर-पार! 8 जून की जनसुनवाई के खिलाफ कलेक्टर दफ्तर में ग्रामीणों का महा-प्रदर्शन
“जान दे देंगे, जमीन नहीं देंगे!” इसी संकल्प के साथ आज रायगढ़ जिला मुख्यालय ग्रामीणों और आदिवासियों के नारों से दहल उठा। आगामी 8 जून को होने वाली जनसुनवाई के विरोध में सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण आज कलेक्टर जनदर्शन में अपनी शिकायत दर्ज कराने पहुंचे।

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में कोयला खनन और औद्योगिक जनसुनवाई को लेकर विरोध की आग एक बार फिर सुलग उठी है। आज (1 जून 2026 को) पेलमा, उरबा, हिंझर, लालपुर और मीलूपारा के सैकड़ों ग्रामीण एकजुट होकर जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों का यह उग्र प्रदर्शन आगामी 8 जून को प्रस्तावित जनसुनवाई के खिलाफ था।
महिलाओं ने संभाली आंदोलन की कमान
इस पूरे विरोध प्रदर्शन की सबसे बड़ी ताकत क्षेत्र की महिलाएं रहीं। गृहस्थी और खेती का काम छोड़, सैकड़ों की संख्या में महिलाओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचे। महिलाओं ने साफ कर दिया कि वे अपनी आजीविका और जल-जंगल-जमीन को किसी भी कॉर्पोरेट या औद्योगिक विनाश की बलि नहीं चढ़ने देंगी।
पूर्व विधायक हृदय राम राठिया के पहुंचे समर्थन
पूर्व विधायक ने साफ शब्दों में कहा कि हम आदिवासियों पे अत्याचार करना बंद करो, जल जंगल जमीन को उजाड़ना बंद करो।
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का समर्थन
ग्रामीणों के इस ‘माटी बचाओ’ आंदोलन को राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का भी भारी समर्थन मिला।

श्री शौकी लाल नेताम जी (जिलाध्यक्ष, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, रायगढ़) ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों का हनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
श्री संत राम खूंटे जी (जनपद पंचायत सदस्य, धरमजयगढ़) ने भी ग्रामीणों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जनदर्शन में विरोध दर्ज कराया।
आदिवासी नेताओं का साझा बयान:
“यह जनसुनवाई सिर्फ कागजी कोरम पूरा करने के लिए की जा रही है। प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों की सहमति के बिना कोई भी निर्णय थोपा गया, तो चक्काजाम और उग्र आंदोलन किया जाएगा।”

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
8 जून 2026 को होने वाली आगामी जनसुनवाई को तत्काल निरस्त किया जाए।
पेलमा, उरबा, हिंझर समेत अन्य गांवों की कृषि भूमि और जंगलों को जबरन अधिग्रहित न किया जाए।
स्थानीय पर्यावरण और आदिवासियों की संस्कृति के संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए।

रायगढ़ कलेक्ट्रेट में आज ग्रामीणों की भीड़ और उनके तीखे तेवर यह साफ बयां कर रहे हैं कि 8 जून की जनसुनवाई प्रशासन के लिए आसान नहीं होने वाली है। अब देखना यह होगा कि जनदर्शन में मिले इस भारी विरोध के बाद जिला प्रशासन क्या कदम उठाता है।



