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नाबार्ड CGM का लाख उत्पादन परियोजना क्षेत्र में दौरा

छत्तीसगढ़

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नाबार्ड CGM का लाख उत्पादन परियोजना क्षेत्र में दौरा

 

जय जोहार इंडिया TV न्यूज छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के घरघोड़ा ब्लॉक में स्थित ग्राम जरकत और ग्राम टेडा में नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक (CGM) ज्ञानेंद्र मनी और उप निदेशक (DDM) मिल्योर बड़ा ने लाख, मिलेट्स और पल्सेज उत्पादन परियोजना का सफल निरीक्षण किया। यह निरीक्षण जनमित्रम कल्याण समिति, रायगढ़ के सहयोग से क्रियान्वित परियोजनाओं के तहत किया गया।
नाबार्ड की इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देना और किसानों की आय में वृद्धि करना है। लाख उत्पादन के साथ-साथ मिलेट्स (मोटे अनाज) और पल्सेज (दलहन) की खेती पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे क्षेत्र के किसानों को पोषण सुरक्षा और आर्थिक लाभ मिल सके। ग्राम जरकत और टेडा व अन्य 15 गांव में परियोजना के तहत किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, बीज आपूर्ति, प्रशिक्षण और बाजार संपर्क प्रदान किए गए हैं।
निरीक्षण के दौरान, CGM ज्ञानेंद्र मनी जी और DDM मिल्योर बड़ा जी ने परियोजना के तहत हो रहे कार्यों का जायजा लिया जिसमे सर्व प्रथम ग्राम जरकत में किसानों से रु बरु हुए और PTDC के सदस्यों से सीधा संवाद कर परियोजना की जानकारी ली और होने वाले लाभ साथ ही समस्याओं से भी अवगत हुए और kcc,पशुपालन, मछली पालन,और महिलाओं को लघु उद्योग से जुड़ने एवं आधुनिक तकनीकी से कृषि कार्य को करने हेतु स्थानीय किसानों से सीधा संवाद किया।लोगो से पिछले 3वर्षों में लिए लाभ के बारे में पूछा ,सभी किसानो ने अपना अपना लाभ बताए और सीजीएम सर को संतुष्ट किए तब सीजीएम सर ने खुद बताया कि नाबार्ड की योजनाएं ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास, कृषि उत्पादकता में वृद्धि और वित्तीय समावेशन पर केंद्रित हैं। इस परियोजना से न केवल लाख उत्पादन में वृद्धि हुई है, बल्कि मिलेट्स और पल्सेज की खेती को भी प्रोत्साहन मिला है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।
ग्राम जरकत और टेडा एवं अन्य 15 गांव के किसानों ने बताया कि नाबार्ड की इस पहल से उन्हें अपनी फसलों के लिए बेहतर बाजार संपर्क मिला है और उनकी आय में वृद्धि हुई है। इस परियोजना से जुड़े किसान अब लाख,लाखों रुपए की आमदनी ले रहे है साथ ही साथ मिलेट्स और पल्सेज की खेती को एक लाभदायक व्यवसाय के रूप में अपना रहे हैं।
नाबार्ड के CGM ज्ञानेंद्र मनी ने कहा, “हमारा उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि लाना है और किसानों को आत्मनिर्भर बनाना है। मिलेट्स और पल्सेज जैसी फसलें न केवल पोषण सुरक्षा प्रदान करती हैं, बल्कि जलवायु अनुकूल भी हैं।” DDM मिल्योर बड़ा ने कहा, “यह परियोजना ग्रामीण किसानों,महिलाओं युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित कर रही है और क्षेत्र के समग्र विकास में योगदान दे रही है।”
जनमित्रम कल्याण समिति, रायगढ़ मनीष सिंह जी ने पूरे 3साल की परियोजना की सफलता की जानकारी प्रस्तुत किए जो पूरे परियोजना में 15गांव में लगभग 5 करोड़ रुपए केवल लाख से किसान लाभ लिए है साथ ही साथ मिलेट्स से और पल्सेज से 3 करोड़ रु की लाभ 15 गांव के 500, किसानों को सीधा मिला है साथ में विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण,एवं अन्य गतिविधि परियोजना क्षेत्र में कराया गया है उसकी जानकारी प्रस्तुत किया गया
डॉ गोस्वामी जी द्वारा भी परियोजना के तकनीकी कार्य प्रणाली की रिपोर्ट प्रस्तुत किया गया साथ आगामी समय में किए जाने वाले कार्यों की रूप रेखा प्रस्तुत किया गया साथ ही समस्त कार्यकर्ता किसानों प्रतिनिधियों ने नाबार्ड के प्रयासों की सराहना की और कहा कि यह परियोजना क्षेत्र के ग्रामीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। नाबार्ड की इस पहल से छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक समृद्धि और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा मिल रहा है।
अन्त में ग्राम टेडा में किसानों महिलाओं से मिले
जानकारी लिए
यहां पर स्वयं सहायता समूह के सदस्य भी मौजूद थे
जो कि लाख से बनने वाले सामग्री
जैसे ,चूड़ी,बक्कल,पेपर वेट जैसे सामग्री को सीजीएम सर को दिखाए और प्रशिक्षण एवं बाजार की उपलब्धता की बात किए एवं नाबार्ड से सहयोग की मांग किए
CGM सर द्वारा हर संभव सहयोग की आश्वाशन दिया गया
अन्त में परियोजना समन्वयक कृपाल सिदार द्वारा एवं जीवन भगत द्वारा समस्त आगंतुकों को धन्यवाद ज्ञापित एवं आभार व्यक्त किया गया।

 

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