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प्रशासन की अनदेखी पर बरसे गोंडवाना गोंड महासभा के जिला उपाध्यक्ष अनिल गोंड: “चमकते रायगढ़ में दम तोड़ रही है पूर्वजों की विरासत” सरकार से की किलों और देवस्थलों के संरक्षण की मांग, समाज से भी एकजुट होने का किया आह्वान।

छत्तीसगढ़, रायगढ़

जय जोहार इंडिया TV न्यूज भारत के सबसे लोकप्रिय न्यूज नेटवर्क 

प्रशासन की अनदेखी पर बरसे गोंडवाना गोंड महासभा के जिला उपाध्यक्ष अनिल गोंड: “चमकते रायगढ़ में दम तोड़ रही है पूर्वजों की विरासत”

सरकार से की किलों और देवस्थलों के संरक्षण की मांग, समाज से भी एकजुट होने का किया आह्वान।

जय जोहार इंडिया TV न्यूज 

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ की आधुनिक चकाचौंध के बीच एक कड़वा सच यह है कि यहां के मूल इतिहास को हाशिए पर धकेला जा रहा है। गोंडवाना साम्राज्य की ऐतिहासिक धरोहरों की बदहाली को लेकर अब गोंडवाना गोंड महासभा (युवा प्रभाग) के जिला उपाध्यक्ष अनिल गोंड ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए अपनी विरासत को बचाने की पुरजोर अपील की है।”

“जिला उपाध्यक्ष अनिल गोंड ने सीधे तौर पर प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा है कि रायगढ़ को बसाने वाले गोंड राजाओं के गढ़-किले और पेनठाना आज अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। राजा पारा स्थित ‘खड़ा बन देव स्थल’ हो या रपटा पुल के पास ‘हरू माजी शक्ति पीठ’, ये पावन स्थल आज जर्जर अवस्था में हैं। अनिल गोंड का सवाल है कि क्या सरकार के पास इन ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने के लिए राशि की कमी है या फिर इच्छाशक्ति की?”

“अनिल गोंड ने चिंता जताते हुए कहा कि जहां एक ओर विकास के नाम पर करोड़ों खर्च किए जा रहे हैं, वहीं रायगढ़ की असली पहचान— गोंडवाना कालीन महलों— पर किसी जन प्रतिनिधि की नजर नहीं पड़ती। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इन धरोहरों का संरक्षण नहीं किया गया, तो हम अपना गौरवशाली इतिहास खो देंगे। इसके लिए उन्होंने समस्त मातृशक्ति और पितृशक्ति को एकजुट होकर अपनी पहचान की रक्षा के लिए आगे आने का आह्वान किया है।”

“अनिल गोंड ने सरकार से मांग की है कि:
राजा पारा और रपटा पुल स्थित देवस्थलों का तुरंत जीर्णोद्धार किया जाए।
गोंड राजाओं के किलों को ‘संरक्षित स्मारक’ घोषित कर बजट आवंटित हो।
स्थानीय जन प्रतिनिधि राजनीति से ऊपर उठकर इस ऐतिहासिक विरासत पर ध्यान दें।”

“अनिल गोंड की यह अपील केवल एक मांग नहीं, बल्कि पूरे समाज की पीड़ा है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन अपनी नींद से जागता है या रायगढ़ का यह स्वर्णिम इतिहास खंडहरों में ही दफन हो जाएगा। इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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