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धरमजयगढ़ के लामीखार प्राथमिक शाला और गोढ़ी आदर्श आदिवासी कन्या आश्रम बने नवाचार के मॉडल

छत्तीसगढ़

रायगढ़ जिले के सुदूर वनांचल के दो नवाचारी विद्यालय शैक्षणिक भ्रमण सूची में होंगे शामिल

धरमजयगढ़ के लामीखार प्राथमिक शाला और गोढ़ी आदर्श आदिवासी कन्या आश्रम बने नवाचार के मॉडल

रायगढ़/ 16 फरवरी 2026/छत्तीसगढ़ रायगढ़ जिले के सुदूर एवं दुर्गम वनांचल क्षेत्र में संचालित दो शैक्षणिक संस्थान धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम पंचायत देउरमार के आश्रित ग्राम लामीखार स्थित शासकीय प्राथमिक शाला तथा ग्राम गोढ़ी में संचालित शासकीय आदर्श आदिवासी कन्या आश्रम को जिला प्रशासन द्वारा शैक्षणिक भ्रमण की सूची में शामिल किए जाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।

एक ओर शिक्षा विभाग द्वारा संचालित प्राथमिक शाला लामीखार है, तो दूसरी ओर आदिमजाति विकास विभाग द्वारा संचालित आदिवासी कन्या आश्रम गोढ़ी। दोनों ही संस्थान प्रत्यक्ष खनिज उत्खनन प्रभावित क्षेत्र में स्थित हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद यहां शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय नवाचार किए जा रहे हैं।

जिले और जिले के सटे अन्य स्कूल के शिक्षक और छात्र भी इस शैक्षणिक संस्थानों के रख रखाव, शिक्षण गतिविधियों सहित सभी नवाचारों को देखने और सीखने आएंगे।

जिला प्रशासन ने जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया है कि इन दोनों विद्यालयों को शैक्षणिक भ्रमण सूची में शामिल करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए तथा संबंधित संचालनालय को प्रस्ताव प्रेषित किया जाए, ताकि राज्य स्तर पर अन्य जिलों के शिक्षक एवं विद्यार्थी भी यहां अध्ययन भ्रमण के लिए आ सकें।

कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी ने क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान अलग-अलग दिनों में इन दोनों संस्थानों का आकस्मिक निरीक्षण किया था। निरीक्षण में पाया गया कि अन्य संस्थानों की तुलना में यहां सकारात्मक दिशा में उल्लेखनीय गतिविधियां संचालित हो रही हैं। विद्यालयों के शिक्षण वातावरण, नवाचारों और समग्र विकास आधारित पहल की सराहना की गई थी।

बाल वैज्ञानिक के रूप में गढ़े जा रहे बच्चे

लामीखार प्राथमिक शाला में कक्षा पहली से पांचवीं तक के विद्यार्थियों से कलेक्टर ने सीधा संवाद किया था। बच्चों ने हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में आत्मविश्वास के साथ उत्तर दिए। उनकी अभिव्यक्ति क्षमता, अनुशासन और सीखने की ललक ने सभी को प्रभावित किया।

विद्यालय में प्रिंट-रिच शिक्षण वातावरण तैयार किया गया है। “कबाड़ से जुगाड़” की अवधारणा पर आधारित पवन चक्की, सौर ऊर्जा मॉडल, यातायात संकेतक, माइलस्टोन, भारत और छत्तीसगढ़ के मानचित्र जैसी शिक्षण सामग्री बच्चों को अनुभव आधारित शिक्षा दे रही है।

विद्यालय परिसर में विकसित किचन गार्डन, हर्बल गार्डन, मसाला बगान और गुलाब गार्डन में लगभग 128 प्रजातियों के फलदार, फूलदार एवं औषधीय पौधे लगाए गए हैं। अंजीर, सेव, चंदन, नींबू, कटहल, चिकोतरा और मौसंबी जैसे पौधों के माध्यम से बच्चों को पर्यावरण एवं व्यवहारिक ज्ञान दिया जा रहा है।

पुस्तकालय और नेतृत्व विकास की अनूठी पहल

“मुस्कान पुस्तकालय” के अंतर्गत बंद पुस्तकालय, खुला पुस्तकालय और चर्चा-पत्र पुस्तकालय का संचालन स्वयं विद्यार्थी करते हैं। लगभग 1500 पुस्तकों का प्रबंधन बच्चों के हाथों में है।

जन्मदिवस पर “एक दिन का गुरुजी” और “आज का फूल” जैसी गतिविधियां बच्चों में नेतृत्व क्षमता, जिम्मेदारी और आत्मविश्वास विकसित कर रही हैं।

जिला प्रशासन ने इन पहलों को जिले के अन्य विद्यालयों के लिए अनुकरणीय मॉडल बताया।

सुदूर वनांचल की लगभग 314 की आबादी वाले आदिवासी बहुल ग्राम लामीखार में संचालित विद्यालय में वर्तमान में 46 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें 30 बालक और 16 बालिकाएं शामिल हैं। वर्ष 2025 में यहां के 8 विद्यार्थियों का विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों में चयन हुआ है। कलेक्टर ने इसे गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और नवाचारों का प्रत्यक्ष परिणाम बताया।

गोढ़ी आदिवासी कन्या आश्रम में समग्र विकास पर जोर

ग्राम गोढ़ी स्थित शासकीय आदर्श आदिवासी कन्या आश्रम में छात्राओं को पाठ्यक्रम के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान, स्वच्छता, नैतिक शिक्षा, पर्यटन स्थलों की जानकारी, राज्य की भौगोलिक स्थिति और सामाजिक व्यवहार की शिक्षा दी जा रही है। सीमित संसाधनों के बावजूद यह संस्थान वनांचल क्षेत्र में शिक्षा के सशक्त केंद्र के रूप में उभर रहा है। कलेक्टर ने खनिज उत्खनन प्रभावित क्षेत्र के दोनों इन शैक्षणिक संस्थानों को और बेहतर बनाने के लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों को कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए है।

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