कागजों पर दौड़ी विकास की ‘गंगा’, तपती गर्मी में बूंद-बूंद पानी को तरस रहे ग्रामीण
छाल :- केंद्र सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक जल जीवन मिशन का मकसद हर घर तक साफ पानी पहुंचाना था। इसके लिए सरकार ने पानी की तरह पैसा भी बहाया। लेकिन रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत पुसलदा में इस योजना को भ्रष्टाचार का ऐसा घुन लगा है कि करोड़ों के बजट के बाद भी ग्रामीणों के गले सूखे हैं। यहाँ कागजों पर तो योजना सरपट दौड़ रही है लेकिन धरातल पर यह सिर्फ ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों की जेब भरने का जरिया बनकर रह गई है। सरकारी फाइलों के मुताबिक ग्राम पंचायत पुसलदा में 109.79 लाख रुपये लगभग 1 करोड़ 10 लाख की लागत से 100 किलोलीटर क्षमता और 12 मीटर ऊंचाई की भव्य आरसीसी स्टील स्ट्रक्चर पानी टंकी बनाई जानी थी। साथ ही 2330 मीटर लंबी पाइपलाइन बिछाकर 409 घरों में नल कनेक्शन दिया जाना था।
कार्य का जिम्मा सराफ कंस्ट्रक्शन खरसिया को साल 2022-23 में सौंपा गया था। लेकिन धरातल पर जो हुआ वह हैरान करने वाला है। ग्रमीणों का आरोप है कि ठेकेदार ने आनन फानन में आधा अधूरा ढांचा खड़ा किया तस्वीरें खिंचवाईं और अधिकारियों से सांठगांठ कर कार्य पूर्ण होने का ठप्पा लगवाकर राशि डकार ली। सबसे बड़ी विडंबना देखिए गाँव में पानी टंकी तो खड़ी है लेकिन उसमें पानी भरने के लिए बोर ही नहीं है जब स्रोत ही गायब है तो टंकी में पानी कहाँ से आएगा और ग्रामीणों के घरों तक कैसे पहुँचेगा।ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि इस पूरे महाघोटाले में विभागीय अधिकारियों की भूमिका बेहद संदिग्ध है। कार्यपालन अभियंता परीक्षित चौधरी सहायक अभियंता सी.एल. कोरी और उप अभियंता जयचंद भगत की नाक के नीचे यह पूरा खेल खेला गया। बिना जमीनी सत्यापन के आधे अधूरे काम पर पूर्णता की मुहर कैसे लग गई यह जांच का एक बड़ा विषय है।
रामजी लाल राठिया, ग्राम पंचायत पुसलदा- टंकी तो बनी है लेकिन उसमें पानी नहीं भरा गया। किसी भी घर के नल में पानी की एक बूंद नहीं आई है। लोग बूंद बूंद पानी के लिए लालायित हैं।
केशव राठिया उपसरपंच, पुसल्दा – गांव में गर्मी के दिनों में पीने के पानी की भयानक समस्या होती है। अगर यह नल जल योजना सुचारू रूप से चालू रहती तो आज गांव को जो पानी की किल्लत झेलनी पड़ रही है वह नहीं होती।
भीषण गर्मी में बूंद बूंद पानी को मोहताज जनता
मई की इस तपती धूप और चिलचिलाती गर्मी में पुसलदा के ग्रामीण पानी के संकट से जूझ रहे हैं। महिलाएं दूर दराज के स्रोतों से पानी ढोने को मजबूर हैं। सरकार का दावा था कि हर घर जल पहुंचेगा लेकिन पुसलदा में हर घर छल हुआ है।