गांव की गलियों से दिल्ली के शीर्ष अस्पताल तक — जानिए कंवर समाज की पहली महिला स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. हर्षा की प्रेरणादायक कहानी
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गांव की गलियों से दिल्ली के शीर्ष अस्पताल तक — जानिए कंवर समाज की पहली महिला स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. हर्षा की प्रेरणादायक कहानी
जय जोहार इंडिया TV न्यूज नेटवर्क छत्तीसगढ़ कोरबा करतला खूंटाकूड़ा – विशेष उपलब्धि / सामाजिक गौरव
“कहा जाता है कि अगर इरादे बुलंद हों और हौसलों में उड़ान हो, तो गांव की पगडंडियों से निकलकर भी सफलता के सबसे ऊंचे शिखर को छुआ जा सकता है। इसे सच कर दिखाया है छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले की बेटी डॉ. हर्षा ने।
ग्रामीण परिवेश से निकलकर, देश के प्रतिष्ठित लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, दिल्ली से MS (Gynaecology) की डिग्री हासिल कर डॉ. हर्षा अब राठिया (कंवर) समाज की पहली महिला स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) बन गई हैं। आइए जानते हैं शिक्षा, समर्पण और समाज सेवा से सजी उनकी पूरी जीवन यात्रा।”

छत्तीसगढ़ के जिला कोरबा, तहसील करतला के छोटे से गांव खुंटाकुड़ा में 15 जनवरी 1998 को डॉ. हर्षा का जन्म एक शिक्षित, संस्कारवान और सेवाभावी ठाकुर परिवार में हुआ। शिक्षा और सेवा का वातावरण उन्हें विरासत में मिला। उनके पिता श्री दुबराज सिंह राठिया एक व्याख्याता (Lecturer) हैं, जबकि माता श्रीमती बिमला राठिया शिक्षिका हैं। दादा श्री नंदलाल राठिया, दादी श्रीमती गजमोती राठिया, चाचा श्री कुमार सिंह (आरक्षक) और चाची श्रीमती दीपा राठिया (आंगनबाड़ी कार्यकर्ता) के संयुक्त मार्गदर्शन में पली-बढ़ीं डॉ. हर्षा के परिवार में हमेशा शिक्षा को पहली प्राथमिकता दी गई। उनकी बहनें—डॉ. वर्तिका (MBBS), प्रेरणा, दीक्षा, सौम्या और भाई नैतिक (बाबू)—भी इसी राह पर आगे बढ़ रहे हैं। परिवार के स्मृति-शेष परदादा-परदादी (बुधवारो एवं रामप्रसाद राठिया) और नाना-नानी (त्रिभुवन सिंह राठिया गौंटिया एवं मायावती राठिया) का आशीर्वाद इस परिवार की बुनियाद रहा है।

गांव के स्कूल से नवोदय का कीर्तिमान
डॉ. हर्षा की शुरुआती पढ़ाई ग्राम पिपरिया और कोड़गार (विकासखण्ड पोड़ीउपरोड़ा) से हुई। इसके बाद कक्षा 6वीं में उनका चयन जवाहर नवोदय विद्यालय, सलोरा (कोरबा) में हुआ।
नवोदय के अनुशासित माहौल में अपनी लगन और कड़ी मेहनत के बल पर उन्होंने कक्षा 12वीं में 93.6% अंक हासिल किए और विद्यालय में एक नया शैक्षणिक रिकॉर्ड कायम किया। यह वही मोड़ था जिसने उनके डॉक्टर बनने के सपने को मजबूती दी।

नवोदय से मिली सफलता के बाद डॉ. हर्षा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा
- उन्होंने रायपुर स्थित प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल मेडिकल कॉलेज से MBBS की डिग्री पूरी की।
- इसके बाद देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक और प्रतिष्ठित लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज से स्त्री रोग में उच्च शिक्षा MS (Gynaecology) की उपाधि हासिल की।,
- इसी के साथ उन्होंने इतिहास रचते हुए राठिया (कंवर) समाज की पहली महिला प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ होने का गौरव प्राप्त किया।

सेवा ही संकल्प — समाज सेवा में पहला कदम
डिग्री पूरी करने के बाद डॉ. हर्षा ने बड़े शहरों की चकाचौंध के बजाय अपनी मिट्टी की सेवा को चुना। उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, करतला में नोडल ऑफिसर (NCD) के रूप में अपनी सेवाएं शुरू कीं।
चिकित्सा को व्यवसाय न मानकर मानव सेवा का माध्यम मानने वाली डॉ. हर्षा विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति सजग हैं। आर्थिक रूप से कमजोर, गरीब और जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क परामर्श और सही मार्गदर्शन देना उनके जीवन का मुख्य उद्देश्य है।

डॉ. हर्षा के व्यक्तित्व की मुख्य झलक:
- जरूरतमंदों की मदद के लिए सदैव तत्पर।
- महिलाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूकता अभियान।
- विनम्र, संवेदनशील और सहयोगी व्यवहार।

“ग्राम पिपरिया के प्राथमिक स्कूल से शुरू हुआ यह सफर आज देश के सबसे बड़े मेडिकल संस्थानों से होता हुआ समाज सेवा के संकल्प तक पहुँचा है। डॉ. हर्षा की यह कहानी सिर्फ एक डॉक्टर बनने की कहानी नहीं है, बल्कि उन तमाम ग्रामीण बेटियों के लिए उम्मीद की एक किरण है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखती हैं।
डॉ. हर्षा ने साबित कर दिया है कि अगर दिशा सही हो और संकल्प दृढ़, तो हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।



