रतनपुर में गूंजे पारंपरिक बाना और सेवा गान: सर्व आदिवासी समाज बिलासपुर द्वारा माँ महामाया को अर्पित की गई ‘पंचमी भेंट’, हजारों की संख्या में जुटे समाजिक जन
छत्तीसगढ़,

जय जोहार इंडिया TV, क्षेत्र के सबसे लोकप्रिय न्यूज नेटवर्क
रतनपुर में गूंजे पारंपरिक बाना और सेवा गान: सर्व आदिवासी समाज बिलासपुर द्वारा माँ महामाया को अर्पित की गई ‘पंचमी भेंट’, हजारों की संख्या में जुटे समाजिक जन
सर्व आदिवासी समाज बिलासपुर द्वारा रतनपुर में भव्य ‘पंचमी भेंट’ संपन्न, माँ महामाया को अर्पित किया गया नया अन्न और श्रृंगार
जय जोहार इंडिया TV न्यूज नेटवर्क दिनांक: 16/10/2026 रतनपुर / बिलासपुर: ऐतिहासिक एवं धार्मिक नगरी रतनपुर में पुरातन लोकसंस्कृति और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। सर्व आदिवासी समाज रतनपुर इकाई एवं स्थानीय समाजजनों के सामूहिक नेतृत्व में प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना के साथ ‘पंचमी भेंट’ का आयोजन अत्यंत हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक अनुष्ठान में बिलासपुर जिले के विभिन्न परिक्षेत्रों, ब्लॉकों के अलावा अन्य जिलों से भी हजारों की संख्या में सामाजिक जन, महिलाएं, युवा और पदाधिकारी सम्मिलित हुए।

बादल महल से आरंभ हुई भव्य यात्रा
कार्यक्रम की शुरुआत रतनपुर के पौराणिक स्थल ‘बादल महल’ से पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ हुई। यहाँ से पारंपरिक बाना, ध्वजा, बाजे-गाजे, गगनभेदी आतिशबाजी और पारंपरिक सेवा गान के साथ एक विशाल यात्रा निकाली गई। यह यात्रा माँ लखनी देवी मुख्यमार्ग से होते हुए माँ महामाया दाई मंदिर प्रांगण पहुँची। यात्रा के दौरान पूरा मार्ग पारंपरिक गीतों और आदिवासी संस्कृति के रंगों से सराबोर नजर आया।

पारंपरिक रीति-रिवाजों और रूढ़ि-प्रथा के साथ हुई पूजा-अर्चना
मंदिर प्रांगण पहुँचने पर समाज के बैगा-भूमका एवं प्रमुख पदाधिकारियों द्वारा रूढ़ि-प्रथा और परंपरा के अनुसार कुलदेवी माँ महामाया दाई की विशेष पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान मातारानी को चुनरी, माला, सुहाग श्रृंगार और नए अन्न का भोग अर्पण किया गया। अनुष्ठान के माध्यम से समाज की आपसी एकता, प्रेम, भाईचारा, सुख-शांति के साथ-साथ प्रदेश एवं क्षेत्रवासियों की खुशहाली के लिए मंगल कामना की गई।

संस्कृति को सहेजने का संदेश
इस अवसर पर सर्व आदिवासी समाज के युवा प्रदेश अध्यक्ष सुभाष सिंह परते ने संबोधित करते हुए कहा कि, “हमें अपनी रूढ़िजन्य परंपराओं को कायम रखते हुए माँ महामाया के प्रति अपनी अगाध आस्था बनाए रखनी चाहिए। अपनी संस्कृति, अपनी परंपरा और रीति-रिवाजों को सहेजना और नई पीढ़ी को सिखाना ही हमारी असली पहचान है।”
प्रमुख सहभागिता
इस भव्य आयोजन में प्रदेश अध्यक्ष सुभाष सिंह परते, आयुष सिंह राज, युवराज प्रधान, शिव नारायण चेचाम, धर्माचार्य के.पी. प्रधान, राजेंद्र जगत, ध्रुवा सिंह ध्रुव, हीरा सिंह मरावी, गीताराम जगत, बसंत मरावी, भगत सिंह पोर्ते, सालिक मरकाम, अनिल मरावी, जयसिंह खुसरो, धनसिंह राजवाड़े, ईश्वर प्रधान, सूरज मरकाम, डॉ. पंकज सिंह परते, भागीरथी ध्रुव, चरण सिंह राज, विवेक ध्रुव, मनोज मरावी, राजेश नेताम, जनक मरकाम, धन सिंह आर्मो, गोलू सिंह, शिव ध्रुव, अविनाश ध्रुव, अभिषेक प्रधान, माखनलाल नेताम, चिंता राम ध्रुव, प्रेम सागर मरकाम, धर्मेंद्र श्याम, लाल सिंह मरावी, सहदेव राज, विजय ध्रुव सहित हजारों की संख्या में महिलाएं, पुरुष और युवा पारंपरिक वेशभूषा में उपस्थित रहे।
जारीकर्ता: आयुष सिंह राज प्रदेश सचिव, सर्व आदिवासी समाज



