छाल में देवी-देवताओं के दिव्य स्वरूपों एवं नृत्य प्रस्तुतियों ने मोहा जनमानस
नन्हे कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने बांधा समां, सांस्कृतिक प्रभारी अशोक पाण्डेय एवं राजेश देवांगन के प्रयासों की हुई सराहना
छाल : विजयदशमी महोत्सव समिति, छाल के तत्वावधान में आयोजित देवी-देवता प्रतिरूपण एवं एकल-युगल नृत्य प्रतियोगिता में नन्हे कलाकारों ने अपनी अनुपम प्रतिभा, मनोहारी प्रस्तुतियों एवं भावपूर्ण अभिव्यक्ति से उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। आकर्षक वेशभूषा, जीवंत अभिनय और मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियों ने पूरे आयोजन को भव्यता प्रदान की। कार्यक्रम में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और बाल प्रतिभाओं का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।
एकल एवं युगल नृत्य प्रतियोगिता में विजेता प्रतियोगिता में यशमिता महंत, नवापारा ने प्रथम, जिज्ञासा दुबे, नवापारा ने द्वितीय तथा आराधना महंत, छाल ने तृतीय स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।देवी-देवता प्रतिरूपण में निखरी बाल प्रतिभाएं देवी-देवता प्रतिरूपण प्रतियोगिता में दिव्यांशी सिंह, छाल ने मां काली का दिव्य स्वरूप धारण कर प्रथम स्थान प्राप्त किया। आयुष्मान पाण्डेय, छाल ने अर्धनारीश्वर के रूप में द्वितीय तथा अंकिता राठिया ने छत्तीसगढ़ महतारी का स्वरूप प्रस्तुत कर तृतीय स्थान हासिल किया।प्रतिभागियों की सजीव प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
सांस्कृतिक प्रभारी के प्रयासों की सराहना
कार्यक्रम को सुव्यवस्थित, आकर्षक एवं सफल स्वरूप प्रदान करने में सांस्कृतिक प्रभारी अशोक पाण्डेय एवं राजेश देवांगन की भूमिका सराहनीय रही। उनके सतत प्रयासों एवं कुशल मार्गदर्शन से नन्हे कलाकारों को अपनी कला और प्रतिभा प्रदर्शित करने का सशक्त मंच मिला। उनकी पहल ने आयोजन की सांस्कृतिक गरिमा को और अधिक समृद्ध किया।
इस अवसर पर वरिष्ठ व्यवसायी केदारनाथ देवांगन, जनपद सदस्य संत राम खूँटे, प्रदीप अग्रवाल, प्रकाश देवांगन, राजेश देवांगन, रामू श्रीवास सहित विजयदशमी महोत्सव समिति के अध्यक्ष नीलांबर राठिया, उपाध्यक्ष अनिल सिंह ठाकुर, महासचिव लालू सिंह ठाकुर, सचिव डॉ. अनुराग सिंह, मेला प्रभारी योगेश राठौर, सांस्कृतिक प्रभारी अशोक पाण्डेय एवं स्वागत प्रभारी भजन राठिया की उपस्थिति रही।समग्र रूप से यह आयोजन विजयदशमी महोत्सव की भव्यता एवं सांस्कृतिक छटा में चार चांद लगाने वाला सिद्ध हुआ। साथ ही, इसने स्थानीय बाल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने, धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करने तथा क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन का प्रेरणादायी संदेश दिया।