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सुशासन तिहार पर फूटेगा आक्रोश: छाल वन परिक्षेत्र के बीट गार्डों के खिलाफ लिखित शिकायत की तैयारी, हाथियों के आतंक से ग्रामीण परेशान

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सुशासन तिहार पर फूटेगा आक्रोश: छाल वन परिक्षेत्र के बीट गार्डों के खिलाफ लिखित शिकायत की तैयारी, हाथियों के आतंक से ग्रामीण परेशान

रायगढ़/छाल: जय जोहार इंडिया TV न्यूज नेटवर्क 

छत्तीसगढ़ सरकार जहां एक तरफ ‘सुशासन तिहार’ मनाकर जनता को बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था का भरोसा दे रही है, वहीं दूसरी तरफ छाल वन परिक्षेत्र से वन विभाग की बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। हाथियों के आतंक और विभागीय उदासीनता से तंग आकर अब क्षेत्र के किसानों ने मोर्चा खोल दिया है। खबर है कि आगामी सुशासन तिहार के मौके पर कई बीट गार्डों के खिलाफ किसानों द्वारा लिखित शिकायत दर्ज कराने की पूरी तैयारी कर ली गई है।

फसलें तबाह, पर सुध लेने वाला कोई नहीं

​छाल वन परिक्षेत्र में हाथियों के दल ने पिछले कई दिनों से डेरा जमाया हुआ था अभी भी सीमावर्ती में मौजूद है। हाथियों ने कई किसानों की मेहनत से उगाई फसलों को रौंदकर बर्बाद कर दिया है। प्रभावित किसानों का आरोप है कि नुकसान के बावजूद वन विभाग के अधिकारी और बीट गार्ड मौके पर सुध लेने नहीं पहुंचे। मुआवजे की फाइलें दबी पड़ी हैं और धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

हाथी के हमले से घायल ग्रामीण इलाज के लिए मोहताज

​विभागीय संवेदनहीनता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कुछ दिन पहले क्षेत्र में एक ग्रामीण पर हाथी ने हमला कर दिया था। गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी उस पीड़ित व्यक्ति को वन विभाग की ओर से कोई तात्कालिक सहायता या राहत नहीं मिली। वर्तमान में घायल ग्रामीण को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है और कई तरह की आर्थिक व मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है: “एक तरफ हाथी हमारी जान-माल और फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वन विभाग के कर्मचारी दफ्तरों से बाहर निकलने को तैयार नहीं हैं। सुशासन तिहार के दिन हम इन लापरवाह अधिकारियों और बीट गार्डों की लिखित शिकायत सीधे उच्च अधिकारियों से करेंगे।”

 

क्षेत्र में बढ़ रहा है तनाव

​हाथियों की मौजूदगी से ग्रामीणों में जहां एक तरफ दहशत का माहौल है, वहीं वन विभाग के इस अड़ियल और सुस्त रवैये ने आग में घी डालने का काम किया है। यदि समय रहते वन अमले ने सुध नहीं ली, तो सुशासन तिहार पर ग्रामीणों का यह आक्रोश एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।।

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