समाधान या सिर्फ रस्म अदायगी? कल धरमजयगढ़ के हाटी में लगेगा ‘समाधान शिविर’, संवाद से समाधान तक… या सिर्फ फाइलों तक?
छत्तीसगढ़, रायगढ़, धरमजयगढ़,

जय जोहार इंडिया TV न्यूज भारत के सबसे लोकप्रिय न्यूज नेटवर्क
समाधान या सिर्फ रस्म अदायगी? कल धरमजयगढ़ के हाटी में लगेगा ‘समाधान शिविर’,
संवाद से समाधान तक… या सिर्फ फाइलों तक?
छत्तीसगढ़ सरकार के ‘सुशासन तिहार’ के अंतर्गत प्रदेश भर में जनसमस्याओं के निराकरण के लिए ‘समाधान शिविर’ लगाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में कल, यानी 13 मई को रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत हाटी में एक विशाल शिविर का आयोजन होने जा रहा है। लेकिन, दावों और हकीकत के बीच की खाई ने ग्रामीणों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
संवाद से समाधान तक… या सिर्फ फाइलों तक?
रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ ब्लॉक में कल हाटी के सामुदायिक भवन (कोरबा रोड) में शिविर का आयोजन है। सरकारी पोस्टरों पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है— “समाधान अब आपके द्वार” और “संवाद से समाधान तक”। इस शिविर में हाटी, पुरूंगा, खर्रा, और जोकड़ा समेत कई गांवों के ग्रामीणों की समस्याओं को सुना जाना है।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या वाकई समाधान होगा?
पिछला अनुभव: नहीं मिली थी आवेदन की पावती??
स्थानीय ग्रामीणों के बीच इस शिविर को लेकर उत्साह कम और संशय ज्यादा है। पिछली बार के अनुभवों को साझा करते हुए कई ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पिछली बार जब शिविर लगा था, तो आवेदन तो जमा कर लिए गए लेकिन कई लोगों को ‘पावती’ (Receipt) तक नसीब नहीं हुई। बिना पावती के ग्रामीण अब यह भी साबित नहीं कर पा रहे कि उन्होंने अपनी समस्या शासन के सामने रखी थी। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि क्या इस बार प्रशासन पारदर्शिता बरतेगा?
सबसे बड़ा सवाल: क्या अपने पुराने क्षेत्र में आएंगे मुख्यमंत्री?
इस शिविर को लेकर सबसे बड़ी चर्चा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के आगमन को लेकर है। बता दें कि मुख्यमंत्री साय रायगढ़ के सांसद रह चुके हैं और इस क्षेत्र की नब्ज से बखूबी वाकिफ हैं। अब जबकि वे प्रदेश के मुखिया हैं, तो जनता की उम्मीदें सातवें आसमान पर हैं।
- क्या मुख्यमंत्री खुद इस शिविर में शामिल होकर ग्रामीणों की सुध लेंगे?
- क्या उनके आने से सालों से लंबित फाइलों पर जमी धूल साफ होगी?
- अगर मुख्यमंत्री आते हैं, तो निश्चित रूप से प्रशासन की सक्रियता बढ़ेगी, लेकिन अगर यह केवल अधिकारियों के भरोसे रहा, तो क्या यह महज एक औपचारिक आयोजन बनकर रह जाएगा?
शिविर कल सुबह से शुरू होगा। एक तरफ प्रशासन तैयारियों में जुटा है, तो दूसरी तरफ ग्रामीण अपनी पुरानी समस्याओं के पुलिंदे के साथ इस उम्मीद में हैं कि इस बार उन्हें “समाधान” के नाम पर केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस परिणाम मिलेंगे।।



