धरमजयगढ़ जिला बनाओ ‘उदयपुर स्टेट’ की पीढ़ियों पुरानी मांग पर अब बड़ा रैली आंदोलन की तैयारी
छत्तीसगढ़, रायगढ़, धरमजयगढ़

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धरमजयगढ़ जिला बनाओ ‘उदयपुर स्टेट’ की पीढ़ियों पुरानी मांग पर अब बड़ा रैली आंदोलन की तैयारी
छत्तीसगढ़ की एक ऐसी ऐतिहासिक रियासत, जिसने सदियों तक इस माटी का गौरव बढ़ाया, आज सिर्फ एक अदद जिला मुख्यालय के लिए मोहताज रहेगी? हम बात कर रहे हैं ‘उदयपुर स्टेट’ यानी आज के धरमजयगढ़ की। प्रदेश में जब भी कटघोरा, पत्थलगांव या सरायपाली को जिला बनाने की सुगबुगाहट तेज होती है, तब-तब धरमजयगढ़ की रगों में दौड़ रहा इतिहास अंगड़ाई लेने लगता है। लेकिन अफ़सोस… राजनीति ने इस ऐतिहासिक क्षेत्र को केवल आश्वासनों के भंवर में छोड़ दिया है।”
ऐतिहासिक गौरव माना जाता है ‘उदयपुर स्टेट’
“इतिहास गवाह है कि धरमजयगढ़ कोई साधारण ब्लॉक तहसील नहीं है। यह ब्रिटिश काल और स्वतंत्रता के समय की ‘उदयपुर रियासत’ (Udaipur State) है, जिसका अपना एक समृद्ध प्रशासनिक ढांचा और स्वर्णिम इतिहास रहा है। जो क्षेत्र कभी खुद सत्ता और न्याय का केंद्र हुआ करता था, आज उसे आजादी के दशकों बाद भी एक जिला मुख्यालय के हक के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। पीढ़ियों से चली आ रही यह मांग आज भी सरकार के बंद कमरों में धूल फांक रही है।”
वादों की हकीकत और आदिवासी समाज का आक्रोश
“जनता का सब्र अब टूट चुका है। पिछले कार्यकाल के दौरान छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज धरमजयगढ़ के ब्लॉक अध्यक्ष महेन्द्र सिदार के नेतृत्व में तत्कालीन मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा गया था। ‘भेंट-मुलाकात’ जैसे बड़े मंचों पर सीधे चर्चा भी हुई थी। लेकिन मिला तो सिर्फ एक खोखला ‘आश्वासन’।
यह विशुद्ध रूप से एक आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है। नियमों और संविधान की कसम खाने वाली सरकारें यह भूल जाती हैं कि जब तक प्रशासनिक पावर (जिला मुख्यालय) आदिवासियों के करीब नहीं होगी, तब तक उनका विकास सिर्फ कागजों पर ही दिखेगा।”
आज भी गरीब आदिवासियों और गरीब ग्रामीणों को अपने छोटे से सरकारी काम या न्याय के लिए मीलों दूर वर्तमान जिला मुख्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं।
बुनियादी सुविधाओं का अकाल: बेहतर अस्पताल, उच्च शिक्षा के लिए कॉलेज और रोजगार के साधन न होने के कारण यहाँ के युवाओं को लगातार पलायन करना पड़ रहा है।
अब आर-पार का शंखनाद “सवाल बहुत सीधा है—क्या ‘उदयपुर स्टेट’ की इस ऐतिहासिक माटी के साथ हो रहा सौतेला व्यवहार अब बंद होगा? क्या मौजूदा सरकार आदिवासियों के इस जायज हक को समझेगी या फिर इस बार भी इस आवाज को राजनीति की भेंट चढ़ा दिया जाएगा? क्षेत्र की जनता की उम्मीदें अब सरकार की नीयत पर टिकी हैं।
“हमारी मांग-हमारा अधिकार (मोर मांग – मोर अधिकार)‘ के इसी नारे के साथ अब आदिवासी समाज के साथ क्षेत्र के ग्रामीण आर-पार के मूड में है। सर्व आदिवासी समाज ब्लॉक अध्यक्ष महेन्द्र सिदार ने बताया कि हम संविधानिक तरीके से क्षेत्र के सभी पीड़ित और शोषित वर्ग एक साथ हम एसडीएम (SDM) कार्यालय में महामहिम राष्ट्रपति जी महामहिम राज्यपाल जी के नाम ज्ञापन सौंपने की रणनीति बन रही है। इस बार यह लड़ाई सिर्फ जिले के नाम पर नहीं, बल्कि क्षेत्र की हक अधिकार जर्जर सड़कों, बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था और आदिवासियों को संवैधानिक अधिकार से लेकर स्थानीय युवाओं के रोजगार जैसे कई अन्य ज्वलंत मुद्दों को जोड़कर सभी एक मंच पर एकजुट होकर संविधानिक अधिकार से प्रदर्शन कर ज्ञापन देंगे।
“इस पूरे मुद्दे पर आपकी क्या राय है? क्या धरमजयगढ़ को जिला बनना चाहिए? कमेंट बॉक्स में अपनी आवाज जरूर बुलंद करें। इसे इतना शेयर कीजिए कि यह सोए हुए प्रशासन के कानों तक पहुंचे।



