
629वें कबीर प्रकटोत्सव विशेष लेख
कबीर: पाखंड के प्रचंड विध्वंसक, प्रेम के युग दृष्टा
हिंदी साहित्य के युग-निर्माता आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने जब संत कबीर को _”वाणी का डिक्टेटर”_ कहकर संबोधित किया, तो वह केवल एक उपाधि नहीं, अपितु एक युग-सत्य की उद्घोषणा थी। सहस्राब्दियों के साहित्यिक इतिहास को मथ डालिए, कबीर जैसा अप्रतिम विचारक, निर्भीक समाज-सुधारक और क्रांतदर्शी कवि दूसरा नहीं मिलेगा।




