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ग्रामीण अंचल “झाल स्कूल” में शिक्षा व्यवस्था चौपट , कहने को कन्या शाला किंतु एक भी महिला व्याख्याता नहीं।

जय जोहार इंडिया TV

CG News : ग्रामीण अंचल “झाल स्कूल” में शिक्षा व्यवस्था चौपट , कहने को कन्या शाला किंतु एक भी महिला व्याख्याता नहीं।

महिला व्याख्याता तो दूर की बात है यहाँ फिजिक्स , बायोलॉजी , केमिस्ट्री , गणित , तथा 9 वी और 10 वी मे अंग्रेजी व विज्ञान के शिक्षक ही नहीं…

9वी से 12वी तक अंग्रेजी के 1 भी शिक्षक नहीं। स्कूल खुले डेढ़ माह हो गए मगर कुछ विषयो के 1 पाठ भी नही पढ़ाया गया…

बरमकेला / सारंगढ़- बिलाईगढ़ जिला के बरमकेला विकासखंड अंतर्गत उड़ीसा बॉर्डर से लगे सुदूर ग्राम पंचायत झाल के शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मे शिक्षकों का अभाव और शिक्षा की स्थिति बदतर है। यह विद्यालय कन्या शाला तो है लेकिन यहाँ एक भी महिला व्याख्याता नहीं है, महिला व्याख्याता तो दूर की बात है यहाँ फिजिक्स , बायोलॉजी , केमिस्ट्री , गणित , अंग्रेजी तथा 9 वी और 10 वी मे विज्ञान के शिक्षक ही नहीं हैं जिस कारण धीरे धीरे विद्यार्थी इस स्कूल से पलायन करते जा रहे हैं।

बता दे कि कुछ सालो पहले यहाँ पढ़ाई करने के लिए बरमकेला- सरिया- सारंगढ़ से विद्यार्थी यहाँ आते थे. आज हालात् ऐसे बन गए हैं कि इसी गांव के पालक अपने पुत्र पुत्री को यहाँँ पढ़ाना नहीं चाहता है, मगर जो पालक गरीब है या जो पालक अपने पुत्र पुत्री को दूर नहीं भेजना चाहता वह यहाँ बिलकुल पढ़ाई नहीं होता ये जानते हुए भी अपने बच्चों को यहाँ भेजने के लिए मजबूर है। झाल के शासकीय कन्या उच्चतर् माध्यमिक विद्यालय में शिक्षकों की कमी से शिक्षा स्थिति बहुत खराब है वर्तमान में अध्ययनरत छात्र छात्राओं का अनुपात भी पूर्व की अपेक्षाकृत बहुत कम हो चुका है। लगातार स्कूल से पलायन से स्कूल की गरिमा भी कम होती जा रही है। इस स्कूल में फिसिक्स् के एक टीचर थे जो बी.एड करने गए हैंं, जिससे साइन्स पढ़ने मे बहुत परेशानी हो रही है। चार विद्यर्थियो ने विषय बदल लिया है, 10 विद्यार्थी अन्य स्कूल चले गए हैं। इसी गाँव से 4 अन्य लड़के झाल स्कूल से निकले हैं लेकिन कम प्रतिशत होने के कारण कालेज मे सेलेक्शन नहीं हो पाया और अभी चारो बेरोजगार घूम रहे हैं।। स्कूल के सफल संचाचन के लिए कुल 13 शिक्षक जरूरी है जिसमे साइंस मे 4 , आर्ट्स मे 4 , कॉमर्स मे 3 और 2 टीचर हिंदी और अंग्रेजी के लिए होना आवश्यक है। लेकिन यहां शिक्षकों की कमी की वजह से बच्चे अच्छी शिक्षा से वंचित होकर या तो पलायन कर रहे हैं या अपना विषय ही बदल दे रहे हैं।

*अनुशासन विहीन….*
इस स्कूल में अध्ययनरत बच्चे खुद बताते हैं कि यहां कोई अनुशासन नाम की चीज़ नहीं है । खाना छुट्टी की बेल रिसेस के बाद वापस क्लास में बैठने की घंटी का कोई टाइम ही नहीं है, तथा किसी भी समय छात्र छात्राओं को क्लास के बाहर जाने की खुली छूट है। स्कूल खुल रहा है और बंद हो रहा है।

बहरहाल इस स्कूल में शिक्षको की कमी दूर कर शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करना चाहिए। जिससे स्कूल में अध्ययनरत गरीब बच्चों को अच्छी शिक्षा प्राप्त हो सके। तथा स्कूल की गरिमा पूर्ववत बनी रहे और लगातार हो रहे छात्र छात्राओं का पलायन रुक सके।।

स्कूल मे पढ़ाई बिलकुल नहीं होता था,जितने समय भी खेलने का मन करे घूमने का मन करे आप जा सकते हैं , कोई रोक टोक नहीं है ।
– विश्व जीत बरिहा भूतपूर्व छात्र

स्कूल खुले हुए एक से डेढ़ माह हो गए हैं, मगर कुछ विषय के 1 पाठ भी पढ़ाया नहीं गया है, ऐसा मेरी बेटी बता रही थी।
– दुबलेश्वर साहू पालक

हम गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करते हैं, हमारे पास इतना पैसा नहीं है कि हम प्राइवेट स्कूल मे अपने बच्चे को पढ़ा सकें, मजबूर होकर हमें सरकारी स्कूल मे ही पढ़ाना पड़ता है।
मनोज कुमार यादव पालक

कका भुपेश आउ फुफा उमेश, मास्टर के बिना एसो जंगल मे मंगल कैसे होही गा?
जयराम पटेल पालक

झाल स्कूल कन्या शाला है फिर भी यहाँँ एक भी मैडम नहीं हैं ।
विराजिनी यादव छात्रा 12वी

क्या टीचर ना होने के कारण विद्यार्थियों को अपना लक्ष्य ही बदलना पड़ रहा है?… जी हाँ।
– संजना पटेल छात्रा 12वी

9वी से 12वी तक अंग्रेजी के 1 भी शिक्षक नहीं हैं,,तथा साइंस मे एक भी व्याख्याता नहीं हैं ।
– प्रतिभा पटेल छात्रा 12वी

कुछ विषय को अभी तक पढ़ाना शुरू भी नहीं किया गया है।
– नंदिनी साहू छात्रा 11वी

हमारे माँग को आगे पहुंचा ने के लिए आपका और आपके समाचार एजेंसी का बहुत धन्यवाद ।
– विराजिनी।

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