मुख्य समाचार

एसईसीएल छाल में नियमों को ठेंगा: विभागीय अल्टीमेटम बेअसर, एसटीपी निर्माण में ठेकेदार की मनमानी जारी

छत्तीसगढ़

एसईसीएल छाल में नियमों को ठेंगा: विभागीय अल्टीमेटम बेअसर, एसटीपी निर्माण में ठेकेदार की मनमानी जारी

छाल : अपनी साख और अनुशासन के लिए पहचाने जाने वाले सार्वजनिक उपक्रम ‘साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड’ के छाल उप-क्षेत्रीय आवासीय परिसर में इन दिनों नियम-कायदों को ताक पर रखकर करोड़ों का खेल चल रहा है। यहाँ निर्माणाधीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के कार्य में ठेकेदार की हठधर्मिता और मनमानी इस कदर हावी है कि विभाग के जिम्मेदार सिविल इंजीनियर भी उसके आगे बौने साबित हो रहे हैं। आलम यह है कि इंजीनियर द्वारा दिए गए कड़े अल्टीमेटम को दरकिनार कर ठेकेदार बिना किसी खौफ के घटिया निर्माण कार्य को लगातार अंजाम दे रहा है।

इंजीनियर का फरमान भी रहा बेअसर

​मामला एसईसीएल आवासीय परिसर का है, जहाँ करोड़ों रुपये की भारी-भरकम लागत से एसटीपी का निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण की शुरुआत से ही ठेकेदार द्वारा तय मापदंडों और गुणवत्ता की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। हाल ही में जब पानी सिर से ऊपर चला गया, तो विभागीय इंजीनियर ने मौके का मुआयना किया। गलत तरीके से की जा रही ढलाई पर सख्त नाराजगी जताते हुए इंजीनियर ने कड़े लहजे में फरमान जारी किया था कि घटिया ढलाई किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगी। उन्होंने बिना मापदंड के हुए ढलाई कार्य को तत्काल तोड़कर नए सिरे से काम करने की सख्त हिदायत दी थी।

​लेकिन ठेकेदार के रसूख के आगे इंजीनियर साहब का यह कड़ा अल्टीमेटम महज एक कागजी शेर बनकर रह गया। ठेकेदार ने विभागीय आदेश को पूरी तरह अनसुना कर दिया और बिना किसी सुधार के ढलाई का काम धड़ल्ले से जारी रखा। ठेकेदार का यह रवैया सीधे तौर पर प्रबंधन को खुली चुनौती देने जैसा है।

करोड़ों का प्रोजेक्ट, फिर भी ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’

​इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ हो चुका है कि एसईसीएल के संबंधित विभाग का ठेकेदार पर रत्ती भर भी नियंत्रण नहीं रह गया है। खुद विभाग के अधिकारी भी दबी जुबान से स्वीकार कर रहे हैं कि निर्माण कार्य गलत तरीके से हो रहा है और इसे तोड़ा जाना चाहिए, लेकिन धरातल पर ठेकेदार के रसूख के आगे सरकारी तंत्र पूरी तरह सरेंडर नजर आ रहा है।

सांठगांठ या दबाव? जनता में आक्रोश

​अब स्थानीय स्तर पर यह सवाल तेजी से गूंज रहा है कि आखिर इस हठधर्मिता के पीछे की वजह क्या है? करोड़ों की सरकारी राशि की बर्बादी पर मूकदर्शक बने जिम्मेदार अधिकारी क्या किसी बड़े राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव में हैं, या फिर यह मौन सहमति किसी अंदरूनी सांठगांठ का हिस्सा है?

​घटिया निर्माण और मानकों की अनदेखी से भविष्य में होने वाले हादसों और सरकारी धन की खुली लूट को लेकर अब स्थानीय स्तर पर भी आक्रोश पनपने लगा है। अब देखना यह होगा कि एसईसीएल प्रबंधन की कुंभकर्णी नींद टूटती है या फिर ठेकेदार की यह मनमानी करोड़ों के इस प्रोजेक्ट को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा देती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Don`t copy text!