TET अनिवार्यता में सेवा सुरक्षा और पूर्व सेवा गणना की मांग को लेकर ‘शिक्षक साझा मंच’ का जोरदार प्रदर्शन, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
छत्तीसगढ़, रायगढ़, धरमजयगढ़

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TET अनिवार्यता में सेवा सुरक्षा और पूर्व सेवा गणना की मांग को लेकर ‘शिक्षक साझा मंच’ का जोरदार प्रदर्शन, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
जय जोहार इंडिया TV न्यूज नेटवर्क छत्तीसगढ़ के एल.बी. संवर्ग के शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए गठित ‘शिक्षक साझा मंच’ ने शिक्षकों की ज्वलंत समस्याओं को लेकर आर-पार की लड़ाई का शंखनाद कर दिया है। संगठन ने सेवारत शिक्षकों को टीईटी (TET) अनिवार्यता से सेवा सुरक्षा प्रदान करने और सहायक शिक्षकों की वर्षों पुरानी वेतन विसंगति को दूर करने के संबंध में प्रदेश के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा है।

धरमजयगढ़ विकासखंड में यह ज्ञापन विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) एवं अनुविभागीय अधिकारी (SDM) के माध्यम से शासन को प्रेषित किया गया।छत्तीसगढ़ के शासकीय विद्यालयों में लंबे समय से सेवारत सहायक शिक्षक एवं शिक्षक संवर्ग अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर लामबंद हो रहे हैं। ‘शिक्षक साझा मंच‘ ने प्रदेशभर में ज्ञापन सौंपने का अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में धरमजयगढ़ क्षेत्र के शिक्षकों ने प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर शासन का ध्यान आकृष्ट कराया।

शिक्षक साझा मंच की दो प्रमुख मांगें:
- TET अनिवार्यता पर सेवा सुरक्षा एवं पदोन्नति: अन्य राज्यों जैसे मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और असम की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी सेवारत शिक्षकों को विशेष TET के माध्यम से सेवा सुरक्षा प्रदान की जाए। साथ ही वरिष्ठता के आधार पर पूर्व प्रचलित नियमानुसार रुकी हुई पदोन्नति प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण किया जाए।
- पूर्व सेवा गणना, वेतन विसंगति व पेंशन लाभ: विधानसभा चुनाव के दौरान दिए गए ‘मोदी की गारंटी’ के वादे के तहत सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति को तत्काल दूर किया जाए। इसके अलावा, प्रथम नियुक्ति तिथि से पूर्व सेवा की गणना करते हुए शिक्षकों को क्रमोन्नति, पेंशन तथा अन्य सभी शासकीय लाभ प्रदान किए जाएं।
“हम वर्षों से निष्ठापूर्वक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यदि हमारी पूर्व सेवाओं की गणना नहीं की जाती और टीईटी की आड़ में सेवा सुरक्षा पर संकट खड़ा होता है, तो यह शिक्षकों के साथ अन्याय है। शासन को सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।”
ज्ञापन सौंपते समय बड़ी संख्या में स्थानीय शिक्षक एवं संगठन के पदाधिकारी उपस्थित रहे। शिक्षकों ने स्पष्ट किया है कि यदि शासन स्तर पर उनकी इन जायज और न्यायसंगत मांगों पर जल्द ठोस व सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।



