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बदली वनांचल की तस्वीर: रायगढ़ के घरघोड़ा और धरमजयगढ़ ब्लॉक के सैकड़ों किसान हुए आत्मनिर्भर, ‘जन मित्रम’ और ‘नाबार्ड’ के प्रयास ला रहे रंग

छत्तीसगढ़, रायगढ़, धरमजयगढ़,

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लाख की खेती से चमकी छत्तीसगढ़ के इन किसानों की किस्मत, कोई बना रहा पक्का मकान तो कोई कर रहा PSC की तैयारी

बदली वनांचल की तस्वीर: रायगढ़ के घरघोड़ा और धरमजयगढ़ ब्लॉक के सैकड़ों किसान हुए आत्मनिर्भर, ‘जन मित्रम’ और ‘नाबार्ड’ के प्रयास ला रहे रंग

 

रायगढ़। छत्तीसगढ़ का रायगढ़ जिला इन दिनों एक अनोखी हरित क्रांति का गवाह बन रहा है। जिले के वनांचल क्षेत्रों—विशेषकर घरघोड़ा और धरमजयगढ़ विकासखंड—में पारंपरिक खेती के साथ-साथ अब ‘लाख की खेती’ ग्रामीणों की समृद्धि का नया आधार बन चुकी है। कभी केवल वनों पर आश्रित रहने वाले यहाँ के सैकड़ों किसान आज लाख उत्पादन के दम पर आत्मनिर्भर हो रहे हैं और सालाना लाखों रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित कर अपने जीवन स्तर को शानदार बना रहे हैं।

📌 न्यूज हाइलाइट्स: क्यों वरदान साबित हो रही है लाख की खेती?

रायगढ़ जिला वर्तमान में छत्तीसगढ़ में लाख उत्पादन के सबसे प्रमुख गढ़ के रूप में उभरा है। इसमें टेडा, बस्तीपाली, भलमुड़ी, सिंघीझाप और सारढाप जैसे गांव अग्रणी हैं।

कुसुम के पेड़ बने ‘एटीएम’: क्षेत्र में लाख के कीट पालने के लिए सबसे उपयुक्त कुसुम के वृक्ष प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं।

बंपर उत्पादन और तगड़ा मुनाफा: एक पूर्ण विकसित कुसुम के पेड़ से लगभग 3 क्विंटल तक लाख मिलती है। बाजार में वर्तमान में विहन लाख की कीमत 1000 से 1200 रुपये प्रति किलोग्राम तक है।

अतिरिक्त जिन किसानों के पास औसतन 10 से 15 कुसुम के पेड़ हैं, वे हर साल 3 से 4 लाख रुपये की अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं। क्षेत्र के लगभग 50% किसान इस खेती से लाखों रुपये कमा रहे हैं।

💼 सफलता की 5 प्रेरक कहानियां: लाख ने कैसे बदली जिंदगी

इस अभियान ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा दी है। क्षेत्र के कई किसानों ने इस आय से अपने सपनों को उड़ान दी है:

समय लाल राठिया (ग्राम भलमुड़ी): लाख से हुई बंपर कमाई की बदौलत इन्होंने करीब 10 लाख रुपये की लागत से अपना शानदार पक्का मकान बनवाया है।

मुरारी राठिया (ग्राम टेडा): इन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति को पढ़ाई के आड़े नहीं आने दिया। लाख की बिक्री से मिले पैसों से आज ये बिलासपुर में रहकर CGPSC की कोचिंग और उच्च शिक्षा ले रहे हैं।

ललित राठिया (ग्राम बस्तीपाली): लाख उत्पादन से मिली पूंजी से ललित ने गांव में ही किराना दुकान खोली। आज उनकी दुकान पर रोजाना 4,000 रुपये तक की बिक्री हो रही है।

रामेश्वर राठिया (ग्राम सारढाप): इन्होंने न सिर्फ नया मकान बनाया, बल्कि 2 एकड़ बंजर भूमि को कृषि योग्य बनाकर वहां बोरवेल लगवाया। अब वे आधुनिक खेती कर रहे हैं।

श्रीमती चंद्रिका राठिया (ग्राम टेडा): एक कुशल गृहिणी होने के साथ-साथ इनके पास 30 से अधिक कुसुम के वृक्ष हैं। लाख की कमाई से इन्होंने अपनी 2 एकड़ जमीन का समतलीकरण कराया, जिससे अब खेती की पैदावार बढ़ गई है।

🤝 ‘जन मित्रम कल्याण समिति’ और ‘नाबार्ड’ का मिला साथ

किसानों की इस सफलता के पीछे रायगढ़ की स्वयंसेवी संस्था जन मित्रम कल्याण समिति का वैज्ञानिक मार्गदर्शन और नाबार्ड (NABARD) का आर्थिक व संगठनात्मक सहयोग है। संस्था ने किसानों को:

लाख उत्पादन की आधुनिक व वैज्ञानिक तकनीक सिखाई।

वृक्ष प्रबंधन और लाख कीट पालन का विशेष प्रशिक्षण दिया। आजीविका संवर्धन के तहत बाजार (विपणन) से सीधा संपर्क उपलब्ध कराया।

🌱 भविष्य की तैयारी: वन विभाग ने भी थपथपाई पीठ

मुनाफे को देखते हुए अब ग्रामीण बड़े पैमाने पर नए कुसुम के पौधों के साथ-साथ सेमियालाता के पौधों का भी रोपण कर रहे हैं, जिससे आने वाले समय में उत्पादन और बढ़ेगा।

वन विभाग के आला अधिकारियों ने भी इस मॉडल की सराहना की है। अधिकारियों का कहना है कि लाख की खेती से एक तरफ जहां वनों का संरक्षण हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीणों का पलायन रुक रहा है। वन विभाग ने संदेश दिया— “शाबाश जन मित्रम, शाबाश किसान। किसान हैं तो देश का विकास है।”

रायगढ़ का यह ‘लाख मॉडल’ इस बात का जीता-जागता सबूत है कि अगर सही मार्गदर्शन (जन मित्रम) और सही संसाधन (नाबार्ड) मिलें, तो हमारे ग्रामीण भारत की तस्वीर कितनी जल्दी बदल सकती है। पारंपरिक खेती के साथ लाख का यह कॉम्बिनेशन “समृद्ध किसान, समृद्ध गांव और समृद्ध भारत” के सपने को सच कर रहा है।।

 

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