आदिवासी युवाओं को संवैधानिक अधिकारों व करियर का दिया मंत्र: रामेश्वरम में 5 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर संपन्न
छत्तीसगढ़

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आदिवासी युवाओं को संवैधानिक अधिकारों व करियर का दिया मंत्र: रामेश्वरम में 5 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर संपन्न
100 युवाओं ने सीखी पेसा कानून, वन अधिकार और नेतृत्व की बारीकियां; प्रमाण-पत्र देकर किया गया सम्मानित
जय जोहार इंडिया TV न्यूज नेटवर्क रामानुजनगर। आदिवासी युवाओं को शिक्षित, जागरूक और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से ग्राम पंचायत रामेश्वरम में आयोजित पांच दिवसीय ‘आदिवासी युवा संवैधानिक, करियर मार्गदर्शन एवं गोटूल प्रशिक्षण शिविर-2026’ का 20 अक्टूबर को गरिमामय समापन हुआ। सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग और ग्राम पंचायत रामेश्वरम के संयुक्त तत्वावधान में 16 से 20 अक्टूबर तक आयोजित इस आवासीय शिविर में करीब 100 युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

समापन अवसर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र एवं शैक्षणिक सामग्री देकर सम्मानित किया गया।
संविधान, पेसा और वन अधिकारों पर गहन मंथन
शिविर में मास्टर ट्रेनर संदीप सलाम और भूपेश मंडावी ने युवाओं को संवैधानिक अधिकारों से अवगत कराया।
संवैधानिक प्रावधान: संविधान की 5वीं व 6ठी अनुसूची, जनजातीय सलाहकार परिषद (TAC), पेसा (PESA) कानून और ग्राम सभा की शक्ति पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।

वन अधिकार अधिनियम-2006: व्यक्तिगत व सामुदायिक वन अधिकारों, दावा प्रस्तुत करने की प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेजों तथा प्राकृतिक संसाधनों व लघु वनोपज के संरक्षण पर व्यावहारिक जानकारी दी गई।
आजीविका व सगा एप: युवाओं को पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था, सगा एप के उपयोग और वन आधारित आजीविका सुरक्षा का पाठ पढ़ाया गया।
“नौकरी तक सीमित न रहें, हर क्षेत्र में बनाएं पहचान”
गोटूल ट्राइबल एजुकेशन डेवलपमेंट सोसायटी के संस्थापक व सर्व आदिवासी समाज (सूरजपुर) के जिलाध्यक्ष बीपीएस पोया ने युवाओं का मार्गदर्शन करते हुए कहा:
“शिक्षा, संवैधानिक जागरूकता और सामाजिक एकजुटता ही आदिवासी समाज की प्रगति का आधार है। युवाओं को केवल सरकारी नौकरी तक सीमित न रहकर व्यापार, खेल, कला-संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र में भी नए आयाम स्थापित करने चाहिए। गोटूल की परंपरा हमें पारंपरिक ज्ञान के साथ आधुनिक दिशा में आगे बढ़ना सिखाती है।”

सुबह 5 से रात 10 बजे तक की अनुशासित दिनचर्या
युवाओं में नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और टीम भावना विकसित करने के लिए उन्हें 5 अलग-अलग समूहों में बांटा गया था। सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक की दिनचर्या में शारीरिक अभ्यास, समूह चर्चा (Group Discussion), अध्ययन और विषय विशेषज्ञों के सत्र आयोजित किए गए।
नाटकों से दिया पर्यावरण संरक्षण व दहेज उन्मूलन का संदेश
समापन समारोह में प्रतिभागियों ने सांस्कृतिक व सामाजिक संदेश देने वाले नाटकों का मंचन किया। इसके माध्यम से अंधाधुंध वनों की कटाई, दहेज प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने और शिक्षा के प्रचार-प्रसार की अपील की गई।
जननायकों के छायाचित्र देकर ट्रेनर्स का सम्मान
उत्कृष्ट योगदान देने वाले मास्टर ट्रेनर्स को अमर शहीद वीर नारायण सिंह, वीर गुंडाधुर, भगवान बिरसा मुंडा एवं सीताराम कंवर के छायाचित्र, पारंपरिक गमछा और नए धान की बालियों से बनी आकर्षक कलाकृतियां भेंट कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में ये रहे उपस्थित
इस अवसर पर ओम प्रकाश पैकरा, राहुल राठिया, पीयूष सिंह, गणपत मरावी, ओम सिंह, देव साय बैगा, गौरीशंकर नेताम, गुलाब नेताम, प्रमोद मरावी, गोटूल शिक्षिकाएं इंद्रकुंवर सिंह, टेकमनिया सिंह, लक्ष्मी सिंह सहित ‘आदिवासी युवा छात्र संगठन’ के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।



